महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आई युवती और उसके पति को मप्र उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत

महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आई युवती और उसके पति को मप्र उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत

महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आई युवती और उसके पति को मप्र उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत
Modified Date: July 13, 2026 / 10:40 pm IST
Published Date: July 13, 2026 10:40 pm IST

इंदौर, 13 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने प्रयागराज में 2025 के दौरान आयोजित महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आई एक युवती और उसके पति द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए एक आपराधिक मामले में उनके खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह ने इस दंपति की रिट याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलों पर गौर के बाद कहा, ‘‘पक्षकारों के अधिवक्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए जिला खरगोन के महेश्वर थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अगली सुनवाई की तारीख तक कोई दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जाए।’’

उच्च न्यायालय ने मामले को 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

अदालत के समक्ष युवती के पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा तथा अधिवक्ता जेरी लोपेज उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी और शासकीय अधिवक्ता सुनीत कपूर ने पक्ष रखा।

दंपति ने युवती के जन्म प्रमाण-पत्र को नगर परिषद महेश्वर द्वारा निरस्त किए जाने के संबंध में राहत की गुहार को लेकर रिट याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया कि इस जोड़े के अंतरधार्मिक विवाह के बाद युवती का जन्म प्रमाण-पत्र बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए निरस्त किया गया जिसके परिणामस्वरूप उसके पति के खिलाफ महेश्वर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) (अपहरण), धारा 81 (छलपूर्वक विवाह अथवा विवाह का विश्वास दिलाकर यौन संबंध), धारा 83 (नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाना) और धारा 87 (अपहरण या व्यपहरण), बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की धारा 9 (वयस्क पुरुष द्वारा बाल विवाह) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के संबद्ध प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थी।

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत इस मामले में युवती के पति की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही निरस्त कर चुकी है।

जोड़े ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि युवती के जन्म रिकॉर्ड में आपराधिक साजिश के तहत हेर-फेर किया गया और उसे विवाह के समय नाबालिग दर्शाने का प्रयास किया गया।

याचिका के मुताबिक इस जोड़े ने 11 मार्च को केरल के एक मंदिर में विवाह किया था।

याचिका में कहा गया है कि युवती की वास्तविक जन्मतिथि एक जनवरी 2008 है और महेश्वर की नगर पंचायत द्वारा जारी उसके जन्म प्रमाण-पत्र के साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी यही जन्मतिथि दर्ज है।

दंपति का आरोप है कि जन्म रिकॉर्ड में बदलाव करके युवती की जन्मतिथि एक जनवरी 2009 दर्शाई गई ताकि विवाह के समय उसे नाबालिग साबित किया जा सके।

दंपति ने याचिका में आरोप लगाया है कि विवाह के बाद युवती के परिजनों ने इस रिश्ते का विरोध किया और मूल जन्म प्रमाण-पत्र को बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए निरस्त करा दिया गया।

दंपति का यह भी आरोप है कि बदले गए रिकॉर्ड के आधार पर युवती के पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई तथा उनके अंतरधार्मिक विवाह को ‘‘लव जिहाद’’ से जोड़कर सांप्रदायिक रंग दिया गया जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया।

भाषा हर्ष खारी

खारी


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