मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के मुहर्रम मेले की मंजूरी बहाल की, महापौर परिषद का प्रस्ताव रद्द

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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के मुहर्रम मेले की मंजूरी बहाल की, महापौर परिषद का प्रस्ताव रद्द

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 10:04 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 10:04 PM IST

इंदौर, 26 जून (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में मुहर्रम मेले के आयोजन का रास्ता साफ करते हुए नगर निगम की महापौर परिषद (एमआईसी) का वह प्रस्ताव शुक्रवार को रद्द कर दिया जिसके जरिये इसकी मंजूरी ऐन वक्त पर वापस ले ली गई थी।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिये बिना लिया गया नगर निगम का यह निर्णय ‘उचित प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया’ के अनुरूप नहीं था।

इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी ने मुहर्रम मेले के परंपरागत आयोजन से जुड़ी वक्फ करबला इंतजामिया कमेटी की याचिका दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद मंजूर कर ली।

इसके साथ ही, एकल पीठ ने एमआईसी का 25 जून (बृहस्पतिवार) का संबंधित प्रस्ताव रद्द कर दिया और मेले की अनुमति उसकी सभी शर्तों सहित बहाल कर दी।

अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसका यह फैसला केवल इस साल के मेले को लेकर है और उसने संबंधित स्थान पर प्रत्येक वर्ष मेला आयोजित करने के अधिकार के प्रश्न का निर्णय नहीं लिया है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया गया कि वक्फ करबला इंतजामिया कमेटी हर वर्ष शहर के धोबी घाट पर ताजिया जुलूस और मेले का आयोजन करती है तथा नगर निगम समय-समय पर इसकी अनुमति देता रहा है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक इस साल नगर निगम ने 25 जून के आदेश के जरिये 1.36 लाख रुपये शुल्क जमा करने की शर्त पर 26 जून से 28 जून तक तीन दिन के मेले की अनुमति प्रदान की थी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि 25 जून की रात एमआईसी ने अचानक बैठक करके अनुमति वापस लेने का प्रस्ताव पारित कर दिया।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अनुमति वापस लेने से पहले उसे सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया और पिछले वर्ष की शर्तों के उल्लंघन या बकाया शुल्क के संबंध में भी कोई नोटिस नहीं दिया गया।

नगर निगम ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि एक प्रथम अपीलीय न्यायालय के 13 सितंबर 2024 के निर्णय में उल्लेख है कि धोबी घाट पर परंपरागत रूप से केवल 0.02 एकड़ भूमि का उपयोग मेले के लिए नहीं, बल्कि महज ताजिया विसर्जन के लिए किया जाता था।

निगम ने यह भी कहा कि इस आयोजन के लिए पिछले वर्ष पूरा शुल्क जमा नहीं किया गया था और अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ था।

अदालत ने तथ्यों पर गौर के बाद कहा कि नगर निगम की 25 जून की अनुमति में कहीं भी उल्लेख नहीं है कि मेला आयोजकों ने पिछले वर्ष की शर्तों का उल्लंघन किया था।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि नगर निगम ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे प्रदर्शित हो कि पिछले वर्ष की शर्तों के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई की गई थी।

एकल पीठ ने कहा कि मेले के आयोजन का आवेदन तीन जून को दिया गया था, लेकिन अनुमति 25 जून को दी गई और उसी रात बिना किसी नोटिस के वापस ले ली गई।

अदालत ने कहा कि इस मामले में नगर निगम की कार्यप्रणाली ‘उचित प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया’ के अनुरूप नहीं थी।

मामले का निपटारा करते हुए उच्च न्यायालय ने यह निर्देश भी दिया कि अगले वर्ष से आयोजन समिति कम से कम ढाई माह पहले आवेदन प्रस्तुत करेगी और नगर निगम मेले के प्रारंभ से कम से कम 30 दिन पहले उस पर निर्णय करेगा।

भाषा हर्ष राजकुमार

राजकुमार