इंदौर, छह मई (भाषा) मध्यप्रदेश के इंदौर में सरकारी क्षेत्र के एक इंजीनियरिंग महाविद्यालय ने मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल के तहत हिन्दी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग का बी.टेक. पाठ्यक्रम पेश किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष तक हिन्दी में पढ़ाई जारी रखने वाले विद्यार्थी को दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला भी किया गया है।
उन्होंने बताया कि शहर का श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) 2026-27 के अगले अकादमिक सत्र से हिन्दी माध्यम में चार वर्षीय बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम शुरू करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि पाठ्यक्रम के अंतिम साल में विद्यार्थी को दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
एसजीएसआईटीएस, सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थान है और इसकी गिनती मध्य भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में होती है। राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्थान के शासी निकाय के पदेन अध्यक्ष हैं।
परमार ने कहा, “राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पृष्ठभूमि वाले हर प्रतिभाशाली विद्यार्थी को अवसर मिले। हिन्दी माध्यम में तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहन देना ऐतिहासिक कदम है जो आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।’
अधिकारियों ने बताया कि एसजीएसआईटीएस में वर्ष 1952 से बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई अंग्रेजी में हो रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल अंग्रेजी माध्यम में बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) की 90 सीट हैं, जबकि हिन्दी माध्यम के लिए 30 अतिरिक्त सीट की स्वीकृति मिली है। नतीजतन अब इस पाठ्यक्रम में कुल 120 विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि एसजीएसआईटीएस के विशेषज्ञों का दल अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मान्यता वाली अंग्रेजी पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद करने की प्रक्रिया में पिछले चार साल से जुटा था।
उन्होंने बताया कि हिन्दी माध्यम में बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई के प्रशिक्षण के लिए एसजीएसआईटीएस के शिक्षकों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की गई हैं।
बहरहाल, पारंपरिक रूप से अंग्रेजी माध्यम वाले उच्च शिक्षा संस्थानों में तकनीकी पाठ्यक्रमों की हिन्दी में पढ़ाई बड़ी चुनौती है और कई विद्यार्थी उचित अध्ययन सामग्री की कमी की शिकायत करते हैं।
एसजीएसआईटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि चार वर्ष पहले संस्थान ने बी.टेक. (बायोमेडिकल इंजीनियरिंग) का पाठ्यक्रम हिन्दी माध्यम में शुरू किया था, लेकिन कई विद्यार्थियों के बीच में अंग्रेजी माध्यम चुन लेने के कारण यह पहल सफल नहीं हो सकी।
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