मप्र: यूसीसी समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट, आदिवासियों को इससे बाहर रखने की अनुशंसा

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मप्र: यूसीसी समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट, आदिवासियों को इससे बाहर रखने की अनुशंसा

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 10:59 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 10:59 PM IST

भोपाल, 13 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी रिपोर्ट सौंप दी जिसमें अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार के विधि विभाग को सौंप दी गई है। विधेयक में आवश्यक संशोधन और वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए इसे भेजा जाएगा। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने पर समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट सौंपने के दौरान समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित रहे। समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके।

बयान के अनुसार, समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित कानूनों तथा परंपराओं का विश्लेषण कर सुझाव दिए गए हैं। इस खंड में 10 अध्याय शामिल हैं।

दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप दिया गया है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।

तीसरे खंड में जन-परामर्श रिपोर्ट है, जिसमें जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लैंगिक पहचान के हिसाब से अलग-अलग और समुदायवार विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया है।

बयान में कहा गया है कि समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है।

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और सहजीवन (लिव-इन संबंध) जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विधेयक का प्रारूप तैयार करने का दायित्व सौंपा था।

समिति ने अपनी अनुशंसाएं तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठानों को अप्रभावित रखने, प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा संवैधानिक प्रावधानों और लोकनीति के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने को आधार बनाया है।

भाषा ब्रजेन्द्र खारी

खारी