प्रसूता मृत्यु के मामलों को लेकर सरकार गंभीर, मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत कमी आई : खींवसर

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प्रसूता मृत्यु के मामलों को लेकर सरकार गंभीर, मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत कमी आई : खींवसर

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 10:47 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 10:47 PM IST

जयपुर, 13 जुलाई (भाषा) राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को कहा कि प्रसूताओं की मृत्यु की हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील और गंभीर है।

खींवसर ने कहा कि कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में हुई अधिकांश मौतों के पीछे खून की कमी (एनीमिया), उच्च रक्तचाप, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव और कुपोषण जैसे कारण रहे हैं।

स्वास्थ्य भवन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए खींवसर ने कहा कि इन सभी मामलों में मरीज विभिन्न स्थानों से रेफर होकर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए थे।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, गंभीर उच्च रक्तचाप के कारण यकृत और गुर्दे के निष्क्रिय होने जैसी जटिल परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं।

खींवसर ने कहा कि राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगातार कमी आई है।

उन्होंने कहा, ‘‘2023-24 में मातृ मृत्यु के 1,094 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024-25 में घटकर 986 और 2025-26 में 824 रह गए। इस प्रकार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आई है।’’

उन्होंने कम समय में प्रसूताओं की लगातार हुई मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक घटना को गंभीरता से ले रही है तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2011 में जोधपुर में तीन दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मृत्यु हुई थी, जिनका कारण एक जैसा था। इसी प्रकार 2011-12 में जयपुर में भी आठ प्रसूताओं की क्रमिक मृत्यु हुई थी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान मामलों में ऐसा नहीं है, सभी प्रसूताएं उच्च जोखिम श्रेणी की थीं और प्रत्येक मामले में मृत्यु के कारण अलग-अलग थे।

बैठक के दौरान खींवसर ने ऑनलाइन माध्यम से बांसवाड़ा और भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों से प्रसूता मृत्यु के मामलों की विस्तृत जानकारी ली।

उन्होंने बीकानेर और कोटा के अस्पतालों के अधीक्षकों एवं प्राचार्यों के साथ भी प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा की।

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण समय है। सभी चिकित्सक निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करें तथा प्रसवपूर्व जांच की निगरानी को और प्रभावी बनाएं।’’

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक उपाय पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

खींवसर ने कहा कि छोटे सरकारी अस्पतालों से बड़े अस्पतालों में भेजे जाने वाले मामलों के संबंध में वरिष्ठ चिकित्सक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं, ताकि छोटे अस्पतालों में ही उच्च जोखिम वाले मामलों की समय रहते पहचान और उपचार हो सके तथा बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम हो।

उन्होंने वरिष्ठ चिकित्सकों को क्षेत्र में जाकर आशा वर्कर, सहायक नर्स एवं प्रसूति कर्मियों तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए।

भाषा बाकोलिया खारी

खारी