PM Awas Yojana: कागजों में घर, हकीकत में सिर्फ झोपड़ी! 5 साल से PM आवास योजना का लाभ पाने की कोशिश में दिव्यांग परिवार, मिला कुछ नहीं बस…

PM Awas Yojana: मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले से जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों की कलई खोल देती है।

PM Awas Yojana: कागजों में घर, हकीकत में सिर्फ झोपड़ी! 5 साल से PM आवास योजना का लाभ पाने की कोशिश में दिव्यांग परिवार, मिला कुछ नहीं बस…

PM AAWAS YOJANA/ image source: IBC24

Modified Date: January 10, 2026 / 02:33 pm IST
Published Date: January 10, 2026 2:31 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मंडला जिले के खड़देवरी गांव में दिव्यांग रामभरोस का 5 साल से पक्का मकान नहीं बना।
  • परिवार ऑटो चलाकर अपने घर का पेट पाल रहा है, फिर भी सिस्टम में फाइलों में फंसा।
  • पंचायत और अधिकारियों को सैकड़ों आवेदन देने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला।

मंडला: सरकार का नारा है, हर गरीब को पक्का मकान और दिव्यांगों को प्राथमिकता। PM Awas Yojana के विज्ञापनों में चमकते घर और मुस्कुराते चेहरे हम सब देखते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले से जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों की कलई खोल देती है।

कहते हैं, जिसका कोई नहीं होता उसका राम होता है, लेकिन मंडला के खड़देवरी गांव में रहने वाले दिव्यांग रामभरोस की जिंदगी आज वाकई सिर्फ राम के भरोसे ही है।PM Awas Yojana का लाभ पाने के लिए पांच साल, सैकड़ों आवेदन और दफ्तरों की अनगिनत चौखटें, लेकिन नतीजा शून्य। सिस्टम की फाइलों में दफन हो चुका एक दिव्यांग का सपना।

PM Awas Yojana Status: 5 साल से पक्का मकान नहीं बना

मंडला जिले की ग्राम पंचायत पीपरपानी का छोटा सा गांव खड़देवरी है। यहाँ रहने वाले रामभरोस बरमैया के हौसले फौलादी हैं। दोनों हाथ और पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद, रामभरोस ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। वह ऑटो चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। सात साल पहले उनकी शादी पूनम से हुई, जो खुद एक पैर से दिव्यांग हैं। दो छोटे बच्चों के साथ इस दिव्यांग दंपत्ति का संसार इसी कच्ची झोपड़ी में सिमटा हुआ है। विडंबना यह है कि जो शख्स समाज के लिए मिसाल है, वह खुद अपने हक के लिए सिस्टम के सामने बेबस है।

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Pradhan Mantri Awas Yojana: सैकड़ों आवेदन देने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला

बरसात का मौसम आते ही इस परिवार की रातें जागकर गुजरती हैं। छत से टपकता पानी, घर के भीतर फैलता कीचड़ और गिरती दीवारों का खौफ उनके जीवन को लगातार चुनौती देता है। रामभरोस बताते हैं कि पिछले पांच से छह सालों से उन्होंने पंचायत से लेकर जिले के बड़े अधिकारियों तक हर जगह अपनी अर्जी लगाई है। हर बार उन्हें केवल एक ही चीज मिली, आश्वासन। कागजों का ढेर बढ़ता गया, लेकिन PM Awas Yojana की नींव आज तक नहीं रखी गई। जब एक आम नागरिक योजना का लाभ ले सकता है, तो 100 प्रतिशत दिव्यांगता की श्रेणी में आने वाले इस परिवार को पात्रता सूची से बाहर क्यों रखा गया? क्या नियम केवल कागजों के लिए हैं?

Mandla News: IBC24 के जरूरी सवाल

सवाल सिर्फPM Awas Yojana  का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का है, जो सबसे कमजोर व्यक्ति को ही सबसे ज्यादा नजरअंदाज करती है। आखिर कब तक यह दिव्यांग दंपत्ति दफ्तरों के चक्कर काटता रहेगा? क्या सरकारी प्राथमिकताएं सिर्फ फाइलों में दफन होकर रह जाएंगी? रामभरोस के नाम में भले ही राम का भरोसा हो, लेकिन आज उनका भरोसा उस सिस्टम से डगमगा रहा है, जिसे उनकी सुध लेनी चाहिए थी।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।