नर्मदा में दूध चढ़ाने की रस्म: एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा

Ads

नर्मदा में दूध चढ़ाने की रस्म: एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा

  •  
  • Publish Date - May 19, 2026 / 04:51 PM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 04:51 PM IST

भोपाल, 19 मई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में एक धार्मिक आयोजन के दौरान नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां अर्पित किए जाने से जल प्रदूषण होने के आरोप संबंधी याचिका पर केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा है।

अधिकरण ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को यह जांच करने का निर्देश दिया कि क्या इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान मौजूदा पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हैं या इनके लिए नए प्रदूषण-रोधी नियमों की आवश्यकता है।

सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र के सतदेव गांव में 21 दिवसीय धार्मिक आयोजन के समापन पर आठ अप्रैल को अनुष्ठान के तहत करीब 11 हजार लीटर दूध नदी में प्रवाहित किया गया था। पर्यावरणविदों ने पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई की।

न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को यह बताने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया कि क्या ऐसे अनुष्ठान मौजूदा पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के दायरे में आते हैं या उनके लिए नए नियमों की जरूरत है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अनुष्ठान के दौरान नर्मदा नदी में लगभग 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां अर्पित की गईं।

उन्होंने दावा किया कि इस अनुष्ठान से नदी की पारिस्थितिकी, जलीय जीवों, सिंचाई स्रोतों और पेयजल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है तथा यह जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

अधिकरण ने कहा कि नदी में दूध प्रवाहित करने से होने वाले प्रदूषण के संबंध में उसके समक्ष कोई वैज्ञानिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेकिन उसने यह भी कहा कि जल अधिनियम की धारा 24 के तहत जलधाराओं और कुओं में प्रदूषणकारी पदार्थों को डालने पर रोक है।

पीठ ने कहा कि कार्बनिक पदार्थों से जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) बढ़ सकती है, जिससे जलीय जीवन प्रभावित हो सकता है।

अधिकरण ने यह भी कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान नर्मदा में दूध प्रवाहित किया जाना पर्यावरण और जनचिंता का विषय बन गया है, जिसकी प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों द्वारा जांच आवश्यक है।

मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के अमरकंटक से होता है और यह 1,312 किलोमीटर की यात्रा करते हुए महाराष्ट्र एवं गुजरात से होकर खंभात की खाड़ी के जरिए अरब सागर में मिलती है।

यह भारत की सबसे बड़ी पश्चिमवाहिनी नदी है और मध्यप्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है।

भाषा दिमो राजकुमार

राजकुमार