भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी कांग्रेस ने अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं, लेकिन उम्मीदवार तय करने के लिए दोनों पार्टियों में जमकर माथापच्ची हुई। कहा जा रहा था कि जीतने वाले को ही टिकट दी जाएगी। इसके लिए बकायदा कई स्तर पर सर्वे भी कराए गए, लेकिन जब उम्मीदवारों की सूची सामने आई तो सारे दावे धरे के धरे रह गए। टिकट वितरण में जनता की राय और सर्वे जैसी कोई भी बात नजर नहीं आती। 90 प्रतिशत सीटों पर चिर-परिचित चेहरे मैदान में हैं। दूसरे दलों से आए लोगों को टिकट से नवाजा गया है।
ग्वालियर जिले की 6 सीटों में से भाजपा-कांग्रेस ने 5-5 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। ग्वालियर ग्रामीण में कुशवाह वोटों के मद्देनजर दोनों दलों ने कुशवाह प्रत्याशी उतारे हैं। कांग्रेस से टिकट न मिलने से नाराज साहब सिंह गुर्जर ने बसपा का झंडा थाम लिया हैं। जयभान सिंह पवैया ने मंत्री होने के नाते पिछले पांच साल में खुद को मजबूत किया है, वहीं कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपना जनसंपर्क बरकरार रखा है। भितरवार में अनूप मिश्रा के उतरने के बाद अब निगाहें पूर्व विधायक बिजेंद्र तिवारी की ओर है।
दतिया जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं। भाजपा ने सेवढ़ा में विधायक प्रदीप अग्रवाल का टिकट काटकर बसपा से आए राधेलाल बघेल पर दांव खेला है। दतिया में भाजपा के नरोत्तम मिश्रा सक्रियता और विकास के सहारे और कांग्रेस के राजेंद्र भारती ग्रामीण क्षेत्रों के भरोसे हैं। मुरैना जिले की 6 विधानसभा सीटों में से मुरैना में कांग्रेस से रघुराज कंसाना और भाजपा से रुस्तम सिंह गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। इस समाज के वोट सबसे ज्यादा हैं। दूसरे नंबर पर ब्राह्मणों के वोट हैं, जिनके सहारे बलवीर दंडौतिया ने हाथी की सवारी की है। रुस्तम सिंह के एक सभा में ब्राह्मणों पर किए गए कमेंट और उसके पहले व्यापारियों पर की गई टिप्पणी का असर चुनाव में दिखेगा। अंबाह, दिमनी और सुमावली में बसपा का हाथी मजबूत है। दिमनी में भाजपा असमंजस में है तो कांग्रेस ने गिर्राज दंडौतिया को अवसर दिया है।
भिंड जिले में 5 विधानसभा सीट है। भिंड और मेहगांव में भाजपा को बगावत का खतरा है। इसीलिए टिकट नहीं बंटे हैं। बसपा ने भिंड में संजीव सिंह के रूप में दमदार चेहरा उतारा है। जिले में जातीय समीकरणों को साधने के लिए ब्राह्मण, ठाकुर और अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरती गई है। कांग्रेस भी भिंड में उलझी है। श्योपुर जिले की दो विधानसभा सीटों में श्योपुर से भाजपा ने विधायक दुर्गालाल विजय पर फिर भरोसा जताया है। कांग्रेस दमदार प्रत्याशी की तलाश में है। विजयपुर में कांग्रेस के रामनिवास रावत का मुकाबला भाजपा के सीताराम आदिवासी से है। मुरैना जिले की सबलगढ़ सीट से चुनाव लड़ने का प्रयास कर रहे रामनिवास रावत को पार्टी ने विजयपुर में ही विजय पताका फहराने की जिम्मेदारी दी है। विजयपुर में भाजपा से नाराज पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा बसपा का टिकट ले आए हैं। जिले में त्रिकोणीय मुकाबले के हालात हैं।
शिवपुरी जिले में 5 विधानसभा हैं। जिले की सभी सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। शिवपुरी में भाजपा की यशोधरा राजे के सामने कांग्रेस ने नए चेहरे सिद्धार्थ लढ़ा को उतारा है। करैरा में भाजपा ने खटीक तो कांग्रेस ने जाटव प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा से रमेश खटीक ने बगावत करके सपाक्स का दामन थाम लिया है। गुना जिले की बात की जाए तो यहां 4 सीटें हैं। बमौरी से भाजपा ने बृजमोहन आजाद के रूप में नया चेहरा उतारा है। टिकट न मिलने पर पूर्व मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। गुना में भी पूर्व विधायक पन्नालाल शाक्य को भाजपा ने किनारे कर गोपीलाल जाटव को टिकट दे दिया। चांचौड़ा में कांग्रेस ने शिवनारायण मीणा की बजाय लक्ष्मण सिंह को मैदान सौंपा है। उनके चुनाव लड़ने की स्टाइल से सब वाकिफ हैं। राघौगढ़ में दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है। अशोकनगर की 3 सीटों में मजेदार स्थिति बन गई है। मुंगावली से भाजपा के उम्मीदवार 6 माह पहले तक कांग्रेस में थे। वे भाजपा से जुड़े और टिकट ले उड़े। चंदेरी से भाजपा के उम्मीदवार बने भूपेंद्र द्विवेदी 10 दिन पहले तक कांग्रेस में थे। दोनों सीटों पर भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अब पुराने कांग्रेसियों को आदाब अर्ज करेंगे।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय और दूसरे दलों के भी प्रत्याशी मैदान में हैं। सूबे में इस बार बीजेपी कांग्रेस के अलावा लगभग दो से ढा़ई हजार प्रत्याशियों के मैदान में होने की संभावना है। अजाक्स और जयस के अलावा 5 और नई पार्टियां चुनावी समर में हैं। साल 2013 के चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो कुल 2583 प्रत्याशियों ने भाग्य अजमाया था। जिनमें से 2080 की जमानत जब्त हो गई थी। इसी तरह वर्ष 2008 में 3179 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, जिनमें से 2654 (83.49%) की जमानत जब्त हुई थी। प्रदेश में लगभग 60 से 70 छोटी-बड़ी पार्टियां अपने प्रत्याशी मैदान में उतारती हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय के साथ-साथ भाजपा-कांग्रेस की ओर से जातिगत गणित के संतुलन के लिए डमी प्रत्याशी मैदान में उतारे जाते हैं। वर्ष 2013 के चुनाव पर नजर डालें भाजपा और कांग्रेस के अलावा 64 छोटी पार्टियों ने अपने कुल 226 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया था, जबकि बिना पार्टी के 1897 प्रत्याशी निर्दलीय रूप से मैदान में उतरे थे।