Reported By: Nasir Gouri
,MP High Court/Image: IBC24 File
MP High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जमीन-जायदाद को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ रजिस्ट्री, नामांतरण और टैक्स भरने से कोई जमीन का मालिक नहीं बन जाता। दरअसल मामला अशोकनगर जिल के धनुधारी बांके देव मंदिर की 98 बीघा जमीन से जुड़ा है। इसकी अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपए है। रिकॉर्ड में ये जमीन मंदिर के नाम दर्ज थी।
MP High Court आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के बेटे कमलदास ने खुद को मालिक बताकर इस जमीन के प्लॉट काटे और कई लोगों को बेच दिए। खरीददारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और सालों तक टैक्स भी भरा। अशोकनगर जिला प्रशासन ने जांच में निर्माण को अवैध माना था। मकान मालिकों ने कोर्ट में प्रशासन के आदेश को चुनौती थी। जिसके बाद, मामला हाईकोर्ट पहुंचा… ओर कोर्ट ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स भरने से स्वामित्व नहीं मिलता। नगर पालिका में नामांतरण भी मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है। जिसके पास वैध स्वामित्व नहीं, वह जमीन बेच नहीं सकता।
MP High Court कोर्ट ने खरीदारों को अतिक्रमणकारी माना है। साथ ही कोर्ट ने हाई कोर्ट ने जमीन खरीदने वालों की याचिका को किया खारिज कर दी। ये फैसला उन लोगों के लिए सबक है जो सिर्फ रजिस्ट्री को मालिकाना हक समझते हैं। जमीन खरीदने से पहले मूल स्वामित्व जरूर जांच लें, वरना आपकी गाढ़ी कमाई डूब सकती है।