Reported By: Vijendra Pandey
,MP High Court News. Image Source- IBC24
जबलपुर। MP High Court News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए बैतूल के एक सरकारी शिक्षक पर दर्ज तीन FIR रद्द कर दीं। कोर्ट ने कहा कि किसी अभिव्यक्ति को तब तक अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक उससे नफरत या हिंसा फैलाने की मंशा स्पष्ट रूप से साबित न हो।
MP High Court News: मामला बैतूल जिले के चिचौली थाना क्षेत्र का है, जहां सरकारी शिक्षक फैजान अंसारी के खिलाफ सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप स्टेटस लगाने को लेकर तीन FIR दर्ज की गई थीं। आरोप था कि शिक्षक ने मशहूर शायर शोएब कियानी की नज्म ‘बेहया’ अपने स्टेटस पर साझा की थी, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हुई। पुलिस ने इस मामले में सामाजिक वैमनस्य फैलाने और शांति भंग होने की आशंका के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित पोस्ट में प्रत्यक्ष रूप से नफरत फैलाने या हिंसा भड़काने जैसी कोई मंशा नजर नहीं आती। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का मौलिक अधिकार है और केवल असहमति या आलोचनात्मक अभिव्यक्ति को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट के इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।