Scindia School Sambhav Abhiyan: शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने बड़ा कदम, सिंधिया स्कूल का ‘संभव अभियान’ बना जनआंदोलन, इतने लाख लोग हुए जागरूक

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शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने बड़ा कदम, सिंधिया स्कूल का ‘संभव अभियान’ बना जनआंदोलन, Scindia School Sambhav Abhiyan For Plastic Free Gwalior

  • Reported By: Nasir Gouri

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 04:48 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 12:19 AM IST
HIGHLIGHTS
  • ग्वालियर में ‘संभव अभियान’ बना प्लास्टिक मुक्त जनआंदोलन
  • The Energy and Resources Institute व The Scindia School से 18 लाख लोगों तक पहुंच
  • 70,000 थैले वितरित, 57,000 लोगों तक सीधी जागरूकता

ग्वालियरः Scindia School Sambhav Abhiyan मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इन दिनों पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक खास मुहिम ‘संभव अभियान’ चर्चा में है। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट और सिंधिया स्कूल के संयुक्त बैनर तले ट्रांसफॉर्मिंग सिटिज़न्स इंटू एक्शन प्रोग्राम के तहत चलाई जा रही यह मुहिम प्लास्टिक मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक जनआंदोलन बनता जा रहा है। इस मुहिम को मोदी सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से भी सहयोग मिल रहा है।

Scindia School Sambhav Abhiyan ग्वालियर में पिछले 2 महीनों से जारी ‘संभव अभियान’ के तहत विभिन्न स्कूलों में “नो टू सिंगल यूज प्लास्टिक” थीम पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें द सिंधिया स्कूल, सिंधिया कन्या विद्यालय और आईटीएम ग्लोबल जैसे संस्थानों के 60 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और अपनी कला के जरिए पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। ‘संभव अभियान’ सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरभर में जन-जागरूकता का बड़ा अभियान बन गया। इसे तहत जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां, सामुदायिक संवाद एवं कपड़े के थैलों के वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं और लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक के खतरों से अवगत कराया गया। ऑफलाइन माध्यम से 57,000 से अधिक लोगों तक संभव अभियान की पहुंच गया। ऑनलाइन एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए लगभग 18 लाख लोगों को जागरूक किया गया। करीब 70,000 कपड़े के थैलों का वितरण किया गया।

द सिंधिया स्कूल फोर्ट के प्रिंसिपल अजय सिंह ने बताया कि पिछले दो महीनों से जारी इस सघन अभियान का उद्देश्य सिर्फ जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि नागरिकों को सीधे एक्शन ओरिएंटेड से जोड़ना है। अभियान के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में जागरूकता रैलियां निकाली गईं और सामुदायिक संवाद के जरिए लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक के खतरों से आगाह किया गया। उन्होंने कहा कि यह हमारे स्कूल और शहर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। हम छात्रों को केवल जागरूक नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें एक्शन ओरिएंटेड बना रहे हैं, ताकि वे भविष्य के पर्यावरण प्रहरी बन सकें।

सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के महत्व पर हुई सार्थक चर्चा

अभियान के दौरान टेरी (The Energy and Resources Institute) से जुड़े डॉ. पी.के. भट्टाचार्य और डॉ. दीपांकर सहारिया जैसे विशेषज्ञों ने छात्रों को सस्टेनेबल लाइफस्टाइल यानी मिशन LIFE के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. दीपांकर सहारिया ने कहा अब समय सिर्फ बातें करने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी उठाने का है। प्लास्टिक मुक्त शहर बनाना केवल सरकार का काम नहीं है। यह हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। जब तक हम अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक नीतियां ज़मीन पर नहीं उतरेंगी। वहीं पर्यावरण आधारित पोस्टर प्रतियोगिता ओर इस प्रोग्राम से जुड़ने वाले अहम लोगों को संस्था ने सम्मानित भी किया।

सिंधिया ग्रुप ऑफ स्कूल के बच्चों ने दी प्रस्तुति

‘संभव अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में सिंधिया गर्ल्स स्कूल ने सैनेटरी पेट पर एक नाटक के जरिए पर्यावरण का संदेश दिया। वहीं “नो प्लास्टिक” पर सिंधिया स्कूल छात्राों ने भी एक नाटक का मंचन किया। कुल मिलाकर यह कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि संभव अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सिंधिया स्कूल का बड़ा कदम है। यह समाज में जिम्मेदार नागरिकता और व्यवहार परिवर्तन को भी प्रोत्साहित करता है।

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‘संभव अभियान’ क्या है?

‘संभव अभियान’ एक पर्यावरण जागरूकता मुहिम है, जिसका उद्देश्य सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।

यह अभियान किन संस्थाओं द्वारा चलाया जा रहा है?

यह अभियान The Energy and Resources Institute और The Scindia School के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।

‘संभव अभियान’ का मुख्य लक्ष्य क्या है?

इसका मुख्य लक्ष्य ग्वालियर को प्लास्टिक मुक्त शहर बनाना और लोगों की जीवनशैली में पर्यावरण के अनुकूल बदलाव लाना है।

इस अभियान के तहत क्या-क्या गतिविधियां की गईं?

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, रैलियां, जनसंवाद, कपड़े के थैलों का वितरण और सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता फैलाने जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आम नागरिक इस अभियान में कैसे भाग ले सकते हैं?

लोग सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर, कपड़े या जूट के बैग अपनाकर और दूसरों को जागरूक करके इस अभियान में योगदान दे सकते हैं।