भोपाल: What will be the effect नए साल की शुरूआत से प्रदेश सरकार के मुखिया के तेवर काफी सख्त हैं। पहले कार्यदिवस से ही मुख्यमंत्री शिवराज ने विभिन्न विभागों की मैराथन मीटिंग कर मंत्रियों अधिकारियों से साथ एक-एक बिंदु पर सीधे बात की है। सीएम शिवराज का पूरा फोकस आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और सुशासन पर रहा है, टार्गेट कितना अचीव हुआ? क्या पैंडिंग है? आगे का रोडमैप क्या है? अधूरे कामों पर क्या एक्शन लिया? किसने कैसा परफोर्म किया इसे लेकर प्रशंसा और फटकार का दौर भी चला? सत्तापक्ष मानता है इससे प्रशासनिक कसावट आई है। जबकि विपक्ष ने इसे कोरा दिखावा बताया है। सबसे बड़ा सवाल ये कि इस पूरी कवायद से धरातल पर क्या असर होगा? आमजन को क्या हासिल होगा?
What will be the effect नए साल में सीएम शिवराज सिंह चौहान अलग ही अवतार में दिखे। प्रशासनिक कसावट और सुशासन के लिए मुख्यमंत्री ने 3 जनवरी से 7 जनवरी तक अलग-अलग विभागों की मैराथन बैठक लेकर अब तक का रिपोर्ट कार्ड देखा। साथ ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए टारगेट भी तय किये। पांच दिन तक चले समीक्षा बैठक में सीएम का पूरा फोकस गुड गर्वनेस को बनाए रखने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रदेश का संतुलित बजट बनाने को लेकर रहा। इस दौरान सीएम ने मंत्रियों से विभागवार सवाल-जवाब किया, तो अफसरों को नए साल के कामकाज के लिये लक्ष्य तय करते हुए सख्त निर्देश भी दिए।
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बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज ने अलग-अलग अफसरों से उनके विभागों से संबंधित कई सवाल पूछे, इनमें नेचर टूरिज्म पर क्या किया, पैसा-कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर क्या रणनीति है, नेशनल पार्क एवं अन्य वनों की ट्रैकिंग की क्या योजना है, अवैध शराब की बिक्री रोकने क्या प्रयास हैं, जीएसटी के दायरे वाले छोटे व्यवसायी समय से आईटी रिटर्न करें, इसे लेकर उनमें कैसे जागरूकता लाई जा सकती है, मंत्रालय में लंबित फाइल का पता करने का क्या सिस्टम है और औसतन फाइल कितने दिन में पूरी हो जाती है। विभागों के पीएस, एसीएस, एचओडी अपने मातहतों की अलमारी चेक कर रहे हैं या यह प्रथा बंद कर दी गई है। पीपीपी के प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने की क्या योजना है। सीएम की समीक्षा के बाद सरकार के मंत्रियों को काम में तेजी आने की उम्मीद है और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम बता रहे है तो विपक्ष सरकार की बैठकों पर सवाल उठा रहे है!
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5 दिन तक चले मैराथन बैठक में सीएम ने कहा कि विभाग का डिजिटाइजेशन जल्दी हो, साथ ही सख्त तेवर में कहा कि बैठक में जो भी निर्देश दिए गए हैं उनकी एक माह बाद समीक्षा की जाएगी। भ्रष्टाचार के मामलों में चल रही जांच में देरी पर भी सीएम ने नाराजगी जताई। कुल मिलाकर नए साल में शिवराज के कई रूप नजर आए। अच्छे काम के लिये तारीफ़ तो वहीं नकारा अफसरों को सीएम शिवराज की फटकार भी मिली।
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