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भोपाल: MP News मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला का अपना समृद्ध अतीत है, लेकिन अब वाग्देवी की भोजशाला पर हिंदू-मुसलमान की काली छाया मंडरा रही है। इस वसंत पंचमी के मौके पर जहां हिंदू समाज अखंड पूजा करने का ऐलान कर चुका है, तो दिग्विजय सिंह ने कानूनी पाठ पढ़ाते हुए भोजशाला में नमाज पढ़ाने की वकालत की। जिसके खिलाफ बीजेपी लामबंद हो गई और ये तक आरोप लगा दिया कि- पाक परस्ती और हिंदू विरोधी बयान देना दिग्विजय सिंह की आदत है।
MP News in Hindi ये तस्वीरें धार की ऐतिहासिक भोजशाला की हैं। जहां साल 2003 सेहिंदू समाज की ओर से मां वाग्देवी की पूजा अर्चना, सुंदर कांड पाठ के जरिए सत्याग्रह जारी है। हर मंगलवार को यहां हिंदू समाज भोजशाला की मुक्ति और मां वाग्देवी सरस्वती की पुनर्स्थापना के लिए एकजुट होता है, लेकिन इस बार 23 जनवरी को वसंत पंचमी मनाने के लिए ढाई हजार से ज्यादा लोग एकत्रित हुए। संकल्प लिया कि-इस बार अखंड वसंत पंचमी मनाई जाएगी।
जहां एक ओर हिंदू समाज आगामी वसंत पंचमी को अखंड पूजा करने की बात कर रहा है, तो अब इस मामले में सूबे का सियासी पारा भी चढ़ गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि- मैं प्रशासन और सरकार से ये कहना चाहूँगा कि- वो ASI द्वारा 2003, 2013 और 2016 में दिए गए आदेश का पालन कराएं। शुक्रवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 तक और उसके बाद 3:30 बजे से सूर्यास्त तक वसंत पंचमी की पूजा कराई जाए। साथ ही दोपहर 1 – 3 का समय शुक्रवार की नमाज़ अदा करने के लिए छोड़ा जाए, लेकिन दिग्गी राजा की ये नसीहत बीजेपी के गले नहीं उतरी। बीजेपी नेताओं ने दो टूक कहा कि- दिग्विजय सिंह मुस्लिमों के खलीफा बने हुए हैं। वसंत पंचमी साल में एक दिन आती है। पूजा में रुकावट नहीं आनी चाहिए। पाकिस्तान परस्ती और हिंदू विरोधी बयान देना दिग्विजय सिंह की आदत बन चुकी है।
कुलमिलाकर इस बार शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी पड़ने के चलते कांग्रेस- भोजशाला में हिंदू-मुस्लिम का एंगल लेकर आ गई है। पुलिस प्रशासन भी ऐहतियातन पूरे दलबल के साथ तैयारी कर रहा है। कांग्रेस-बीजेपी के बीच जुबानी जंग छिड़ी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि- आखिर हिंदू त्योहारों पर ही दिग्विजय सिंह के पेट में मरोड़ें क्यों उठती हैं? सवाल ये भी कि- आखिर दिग्विजय सिंह भोजशाला में नमाज पढ़वाने की जिद क्यों कर रहे हैं? सबसे बड़ा सवाल ये कि- क्या मुस्लिम समाज इतनी सदाशयता नहीं दिखा सकता कि-वसंत पंचमी के दिन भोजशाला में अखंड पूजा हो सके?