‘भूत बंगला’ के गाने में नकल के आरोप बेबुनियाद, सत्यजीत रे का सम्मान करता हूं: प्रियदर्शन

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‘भूत बंगला’ के गाने में नकल के आरोप बेबुनियाद, सत्यजीत रे का सम्मान करता हूं: प्रियदर्शन

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 12:30 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 12:30 PM IST

मुंबई, सात अप्रैल (भाषा) फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने ‘भूत बंगला’ के एक गीत पर नकल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह महज अफवाह है और इसका सत्यजीत रे की फिल्म से कोई संबंध नहीं है।

फिल्म ‘भूत बंगला’ के गीत ‘राम जी भला करें’ की हुक लाइन में ‘भूतेर राजा दिलो बोर’ जैसी अभिव्यक्ति का इस्तेमाल किया गया है। ‘भूतेर राजा दिलो बोर’ सत्यजीत रे की 1969 की फिल्म ‘गूपी गायने बाघा बायने’ का गीत है।

प्रियदर्शन ने कहा कि फिल्म उद्योग में शब्दों की पुनरावृत्ति असामान्य नहीं है।

उन्होंने कहा, “मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं क्योंकि मैंने सिनेमा उन्हीं जैसे दिग्गजों से सीखा है। ‘भूत’ शब्द का इस्तेमाल कई फिल्मों में हुआ है। जैसे ‘दीवाना’ शब्द सैकड़ों फिल्मों में इस्तेमाल हुआ है। इसका मतलब यह नहीं कि जिसने पहले इसका इस्तेमाल किया, उसी का अधिकार है। यह सिर्फ एक शब्द है। धुन का उस गीत से कोई लेना-देना नहीं है।”

‘हेरा फेरी’, ‘भूल भुलैया’ और ‘हंगामा’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर प्रियदर्शन ने कहा कि वह सत्यजीत रे को भारतीय सिनेमा का ‘भगवान’ मानते हैं।

उन्होंने कहा, “गीतकार ने ये शब्द लिखे हैं और हमें इस पर पूरा भरोसा था। इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि हमारी फिल्म ‘भूत बंगला’ है। आपको यह भी समझना चाहिए कि पहले भी ‘भूत बंगला’ नाम से एक फिल्म बन चुकी है, जिसमें महमूद और आर. डी. बर्मन थे। ऐसे दोहराव होते रहते हैं।”

इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म में अक्षय कुमार, तब्बू, वामिका गब्बी, परेश रावल, राजपाल यादव, मिथिला पालकर और राजेश शर्मा जैसे कलाकारों ने काम किया है।

बालाजी मोशन पिक्चर्स द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म का निर्माण अक्षय कुमार, शोभा कपूर और एकता आर कपूर ने किया है।

‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि 16 अप्रैल को रात नौ बजे से इसके पेड प्रीव्यू शुरू होंगे।

फिल्म का पेड प्रीव्यू आधिकारिक रिलीज तारीख से एक या दो दिन पहले (आमतौर पर बृहस्पतिवार की शाम) चुनिंदा सिनेमाघरों में उस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग होती है। दर्शक टिकट के लिए सामान्य से अधिक पैसे देकर फिल्म पहले देखते हैं। प्रचार की इस रणनीति का उद्देश्य बड़े बजट की फिल्मों के लिए उत्सुकता पैदा करना और टिकट की ऊंची कीमतों से अतिरिक्त कमाई करना है।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव