बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: आरोपी को परदादी के अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों में शामिल होने की अनुमति
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: आरोपी को परदादी के अंतिम संस्कार के बाद की रस्मों में शामिल होने की अनुमति
मुंबई, तीन अगस्त (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने राकांपा नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में 27 वर्षीय आरोपी को सोमवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच एक दिन के लिए उसकी परदादी के अंतिम संस्कार के बाद होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दे दी।
आरोपी दिलीप पारधी ने 28 जुलाई को अपनी 103 वर्षीय परदादी की मृत्यु के बाद मानवीय आधार पर आठ अगस्त से 16 अगस्त तक अस्थायी जमानत की मांग की थी।
पारधी ने दावा किया था कि आदिवासी समुदाय की परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद होने वाले कार्यक्रमों के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है, क्योंकि परिवार में वह ही एकमात्र पुरुष सदस्य है जो आवश्यक रस्में पूरी कर सकता है।
विशेष लोक अभियोजक महेश मुले ने पारधी की आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया।
अभियोजन पक्ष ने मौजूदा मामले की सुनवाई के दौरान हाल ही में हुई उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक गवाह पर गोली चलाई गई थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि अगर पारधी को रिहा किया जाता है तो उसके फरार होने, गवाहों को प्रभावित करने या उन्हें डराने का काफी खतरा है।
महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) से संबंधित मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने दोनों पक्षों की दलील को सुनने के बाद पारधी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच एक दिन के लिए नौ अगस्त को अंबरनाथ के वांगणी-कुलगांव में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दे दी।
अदालत ने कहा कि आरोपी ने दावा किया है कि परिवार में रस्में निभाने के लिए वही एकमात्र पुरुष सदस्य है।
अदालत ने कहा, “हालांकि, सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि आवेदक का एक सगा चचेरा भाई भी है, जो उक्त रस्मों को पूरा करने में सक्षम है।”
न्यायाधीश ने कहा कि अदालत “परदादी और परपोते के बीच मौजूद भावनात्मक संबंध के प्रति असंवेदनशील नहीं है” और गंभीर आपराधिक मामलों में भी मानवीय आधार पर विचारों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा, “साथ ही, ऐसे विचारों को आरोपों की गंभीरता, आवेदक की आपराधिक पृष्ठभूमि, मुकदमे की स्थिति और स्वतंत्रता के दुरुपयोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए संतुलित करना होगा।”
अदालत ने कहा कि पारधी यह स्पष्ट विवरण देने में असफल रहा कि किन विशेष आदिवासी परंपराओं के लिए उसकी लगातार आठ दिन तक मौजूदगी जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि 12 अक्टूबर 2024 की रात मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री सिद्दीकी की उनके बेटे जीशान के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इस मामले में कुल 27 लोगों पर हत्या और अन्य अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और मकोका के तहत आरोप लगाए गए हैं।
भाषा जोहेब प्रशांत
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