मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) एक विशेष अदालत ने बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में जेल में बंद गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को हिरासत में लेने में विफल रहने पर शहर की पुलिस को शुक्रवार को फटकार लगाई और उसे अदालत के समक्ष पेश कराने के लिए सभी कानूनी कदम उठाने का निर्देश दिया।
महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत के न्यायाधीश सत्यनारायण आर. नवंदर राकांपा के दिवंगत नेता के परिवार की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हत्या के मामले में अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह पुलिस को उसके कर्तव्यों की याद दिलाए।
अदालत ने 24 जुलाई तक सख्ती से अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा, ‘‘किसी आरोपी को हिरासत में लेना, जांच करना, आरोपी से पूछताछ करना और उसे मुकदमे के लिए पेश करना, ये सभी जिम्मेदारियां केवल जांच एजेंसी और कानून लागू करने वाले अधिकारियों की होती हैं।’’
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह जांच एजेंसी को उसके वैधानिक कर्तव्यों की याद दिलाए, विशेष रूप से तब, जब मामला हत्या जैसे गंभीर अपराध से संबंधित हो।
सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर 2024 की रात मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में उनके बेटे जीशान के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल को पिछले साल नवंबर में अमेरिका से प्रत्यर्पित किया गया था और इसके बाद उसे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया था। वह वर्तमान में नयी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
सिद्दीकी परिवार ने पिछले सप्ताह अदालत का रुख करते हुए पुलिस को बिश्नोई की हिरासत लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। परिवार ने आरोप लगाया था कि पुलिस ‘‘बाहरी दबाव’’ के कारण ऐसा करने से बच रही है।
पुलिस को फटकार लगाते हुए विशेष न्यायाधीश ने कहा कि यह ‘‘वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति’’ है कि अदालत को फरार आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करने पड़ रहे हैं।
जांच एजेंसी ने जानबूझकर बचने के आरोपों से इनकार करते हुए एक लिखित जवाब प्रस्तुत किया।
जांच एजेंसी ने कहा कि यदि कानून इसकी अनुमति देता है, तो वह बिश्नोई की हिरासत लेने के लिए तैयार है, लेकिन उसने इसके लिए परिचालन संबंधी बाधाओं का हवाला दिया।
न्यायाधीश ने हालांकि कहा कि सक्षम अदालत की अनुमति से आरोपी को वर्तमान मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि यदि आवश्यक हो, तो आरोपी को दिल्ली की संबंधित अदालत से उचित अनुमति प्राप्त करने के बाद न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी उससे पूछताछ की जा सकती है।
अदालत ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसी ने अपने लिए उपलब्ध इन सभी कानूनी विकल्पों की पूरी तरह अनदेखी की है।’’
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप