मुंबई, 25 अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली प्रतिद्वंद्वी शिवसेना पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे का स्पष्ट कहना था कि पार्टी से ‘‘गद्दारी’’ करने वाले निर्वाचित नेताओं के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए।
सावंत ने कहा कि ठाकरे के विचार, खासकर संगठन के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता पर उनका जोर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं ।
बोरीवली में ‘जय महाराष्ट्र नगर’ व्याख्यानमाला के 44वें संस्करण को संबोधित करते हुए मुंबई दक्षिण के सांसद ने शुक्रवार को कहा, ‘‘जो व्यक्ति पार्टी का टिकट लेकर चुनाव जीते और फिर पार्टी के प्रति वफादार न रहे तो यह पार्टी के साथ गद्दारी है। बालासाहेब ठाकरे कहते थे कि ऐसी गद्दारी बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए और इसके लिए कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’’
यह व्याख्यान ‘आठवणींतले बालासाहेब’’ (बालासाहेब की यादें) शीर्षक से ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
सावंत ने कहा कि ठाकरे ने मराठी भाषियों के न्यायोचित अधिकारों की लड़ाई के लिए शिवसेना की स्थापना की थी और बाद में हिंदुत्व को अपना मूल एजेंडा बनाया।
बाबरी मस्जिद विध्वंस का जिक्र करते हुए सावंत ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुंदर सिंह भंडारी ने इस घटना से पार्टी को अलग करने की कोशिश की, तब ठाकरे ने खुलकर कहा था कि अगर शिवसेना कार्यकर्ता इसमें शामिल थे तो उन्हें उन पर गर्व है।
सावंत ने कहा कि ठाकरे ने कभी अपने लिए कुछ नहीं मांगा, लेकिन आम शिवसेना कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया और उनकी तरक्की सुनिश्चित की।
उन्होंने कहा, ‘‘बालासाहेब पार्टी कार्यकर्ताओं के सुख-दुख का बहुत ख्याल रखते थे। वे अक्सर पूछते थे कि किसी कार्यकर्ता को कोई परेशानी तो नहीं है। वे संवेदनशील और उदार थे, लेकिन जब जरूरत होती थी तो कठोर भी।’’
भाषा खारी माधव
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