मुंबई, 30 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मंत्री ओमप्रकाश बाबाराव कडू उर्फ बच्चू कडू के शिवसेना में शामिल होने के बाद बृहस्पतिवार को उनका राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ में स्वागत किया।
लेकिन उसने पूर्व में बार-बार निष्ठा में बदलने को लेकर उनपर निशाना भी साधा।
कडू ने प्रहार जनशक्ति पक्ष (पीजेपी) नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। वह शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में यहां सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हुए। इसके तुरंत बाद शिवसेना ने उन्हें 12 मई के विधानपरिषद चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशी घोषित कर दिया।
शिवसेना की सहयोगी और सत्तारूढ़ ‘महायुति’ का नेतृत्व कर रही भाजपा ने कडू का गठबंधन में स्वागत करते हुए उनकी राजनीतिक यात्रा को लेकर उन पर निशाना भी साधा।
प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कडू की 1999 से अबतक की राजनीतिक यात्रा का विस्तृत विवरण दिया और उनके बदलते रुख पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। हालांकि उन्होंने एक सहयोगी के रूप में उनका सधे हुए शब्दों में स्वागत किया।
कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि कडू ने टिकट नहीं मिलने पर अविभाजित शिवसेना छोड़ दी और चुनावी फायदे के लिए अपने वैचारिक रुख से समझौता किया।
उन्होंने दावा किया कि कडू ने हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपनाए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राज्य के नेताओं समेत वरिष्ठ नेताओं की आलोचना की थी और सत्ता के लिए समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ हाथ मिलाया।
भाजपा प्रवक्ता ने पूर्व विधायक के अतीत के आंदोलनों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने राजनीतिक दांव-पेचों को साधने के लिए अलग-अलग मौकों पर किसानों, कृषि मजदूरों और दिव्यांगों के मुद्दों का इस्तेमाल किया।
कुलकर्णी ने दावा किया कि कडू ने सत्तारूढ़ गठबंधन का विरोध किया था और बाद में उसमें वापस लौटने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके कार्यों में राजनीतिक अवसरवादिता झलकती है।
कडू ने 1999 में तत्कालीन अविभाजित शिवसेना छोड़ दी और विदर्भ क्षेत्र के अमरावती जिले में पीजेपी की स्थापना की। उन्होंने चार बार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की, लेकिन 2024 के चुनाव में हार गए।
भाषा धीरज राजकुमार
राजकुमार