भाजपा की ‘बहुसंख्यकवादी राजनीति’ का नतीजा गणेश उत्सव के दौरान शराब पर रोक : कांग्रेस

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भाजपा की ‘बहुसंख्यकवादी राजनीति’ का नतीजा गणेश उत्सव के दौरान शराब पर रोक : कांग्रेस

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  • Publish Date - September 11, 2026 / 06:23 PM IST,
    Updated On - September 11, 2026 / 06:23 PM IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि पुणे जिले में 10 दिन के गणपति उत्सव के दौरान अधिकारियों द्वारा शराब पर लगाई गई पाबंदी, पिछले 12 सालों में ‘‘बहुसंख्यकवादी राजनीति’’ के धीरे-धीरे बढ़ने का नतीजा है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि केंद्र में 2014 से सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया और संघ परिवार से जुड़े संगठनों तथा अपने कार्यकर्ताओं के जरिये जमीनी स्तर पर दबाव बनाकर समाज में बहुसंख्यकवाद का माहौल बनाया है।

सावंत ने कहा, ‘‘सत्ता हासिल करने के लिए कुछ भी करना न केवल लोकतंत्र के लिए बल्कि देश की सामाजिक एकता के लिए भी खतरनाक है। सरकार को कोई फैसला लेते समय केवल बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ध्यान में नहीं रखना चाहिए। उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे फैसले से दूसरे नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता, जीवन-शैली या अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।’’

उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।

सावंत ने मीरा भायंदर के एक स्कूल की हालिया घटना का भी उल्लेख किया, जहां कथित तौर पर जैन समुदाय के ‘पर्युषण’ पर्व के मद्देनजर छात्रों से प्याज, लहसुन और मिट्टी के अंदर उगने वाली सब्जियों युक्त भोजन नहीं लाने को कहा गया था। उन्होंने इसे इसी तरह की सोच का एक और उदाहरण बताया।

सांवत ने कहा, ‘‘सभी की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उन मान्यताओं को दूसरों पर थोपा नहीं जाना चाहिए।’’

इससे पहले दिन में मुंबई उच्च न्यायालय ने गणेश उत्सव के दौरान पुणे में शराबबंदी को लेकर जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और सवाल किया कि जब मुंबई तथा अन्य क्षेत्रों में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है तो केवल पुणे को ही क्यों चुना गया।

मुख्य न्यायाधीश एम. सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने प्रशासन को शराबबंदी का आदेश वापस लेने या न्यायिक हस्तक्षेप का सामना करने को कहा। पीठ ने कहा कि एक जिले में इस तरह मनमाने तरीके से प्रतिबंध लगाकर पुणे और उसके निवासियों को बदनाम किया जा रहा है।

अदालत पुणे के होटल मालिकों और शराब की दुकानों के मालिकों के संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में पुणे के जिलाधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।

भाषा

शुभम धीरज

धीरज