मुंबई, 22 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि ध्वनि और वायु प्रदूषण के बिना भी त्योहार मनाए जा सकते हैं।
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने गणेशोत्सव के दौरान यह आदेश पारित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक जुलूसों में लाउडस्पीकर, ‘डीजे’ और ‘लेजर बीम’ का उपयोग पूरी तरह से अनुचित है।
अदालत ने कहा, ‘क्या हम लाउडस्पीकर और पटाखों का उपयोग करके भगवान से अतिरिक्त आशीर्वाद प्राप्त करने जा रहे हैं? एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमें इन सब पर रोक लगानी चाहिए। उदाहरण के लिए वारी यात्रा (पंढरपुर की पैदल तीर्थयात्रा) को ही ले लीजिए। इसे बिना किसी लाउडस्पीकर या शोर-शराबे के बेहद शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाता है।’
अदालत ने धार्मिक यात्राओं के दौरान होने वाले गंभीर ध्वनि और वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया था।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने कहा कि मुंबई पुलिस ने नौ सितंबर से 26 सितंबर के बीच बिना अनुमति के पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया है। उन्होंने बताया कि पटाखों और लाउडस्पीकर पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है।
इसके बाद अदालत ने सवाल किया कि क्या इस आदेश का पालन किया जा रहा है।
अदालत ने कहा, ‘यह केवल कागजों पर अच्छा है। इसका उल्लंघन साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।’
न्यायाधीशों ने कहा कि वे सड़कों पर पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश पारित करेंगे और अधिकारियों को जुलूसों के दौरान शोर के स्तर को नियंत्रित करने तथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी कदम उठाने का निर्देश देंगे।
भाषा प्रचेता अविनाश
अविनाश