कारोबारी सुधीर वालिया ने 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया

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कारोबारी सुधीर वालिया ने 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 10:21 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 10:21 PM IST

मुंबई, 25 मई (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने 1,000 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय धोखाधड़ी मामले में कारोबारी सुधीर वालिया की ओर से मांगी गई अंतरिम सुरक्षा पर सोमवार को कोई आदेश पारित नहीं किया। मामले में यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर भी आरोपी हैं।

मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वाईपी मनथकर ने कहा कि ‘‘प्राथमिकी में लगाए गए आरोप गंभीर हैं’’ और ‘‘कोई भी आदेश पारित करने से पहले दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करना आवश्यक है।’’

मामले में गिरफ्तारी की आशंका से वालिया ने अग्रिम जमानत का अनुरोध किया है। उन्होंने अपनी मुख्य याचिका पर फैसला आने तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने का भी अनुरोध किया है।

मामले की अगली सुनवाई एक जून को होगी।

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कपूर, सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड (सुरक्षा एआरसी) के निदेशक वालिया और अन्य के खिलाफ 1,000 करोड़ रुपये की गिरवी रखी संपत्ति के कथित अवैध हस्तांतरण के आरोप में एक नयी प्राथमिकी दर्ज की है।

यह मामला एचडीआईएल की सहयोगी कंपनी सफेयर लैंड डेवलपमेंट से जुड़े लखमिंदर दयाल सिंह की शिकायत पर वर्ली पुलिस थाने में दर्ज किया गया है।

प्राथमिकी के मुताबिक, एचडीआईएल समूह की एक अन्य कंपनी प्रिविलेज पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने 2015 में यस बैंक की वर्ली शाखा से 300 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।

वित्तीय संकट के कारण सफेयर लैंड डेवलपमेंट ने 150 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया, जिसे बैंक ने 2016 में स्वीकृत किया था।

एचडीआईएल और उसकी समूह कंपनियों की 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को ऋण की सुरक्षा के लिए बैंक के पास गिरवी रखा गया था, जिसे 36 महीनों के भीतर चुकाया जाना था।

हालांकि, जून 2018 में सिंह को पता चला कि यस बैंक ने सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को उनकी कंपनी से 176.53 करोड़ रुपये वसूलने के लिए अधिकृत कर दिया था, जबकि भुगतान की अवधि अभी समाप्त नहीं हुई थी।

सिंह ने आरोप लगाया कि 1,000 करोड़ रुपये मूल्य की गिरवी रखी संपत्ति को अवैध रूप से सुरक्षा एआरसी को हस्तांतरित कर दिया गया, जबकि कंपनी को 2019 की विशेष लेखापरीक्षा रिपोर्ट के अनुसार गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घोषित नहीं किया गया था।

उन्होंने दावा किया कि संपत्तियों को बाजार मूल्य से कम दाम पर बेच दिया गया।

अपनी अग्रिम जमानत याचिका में वालिया ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें दुर्भावनापूर्ण इरादे से फंसाया गया है।

भाषा सुभाष पारुल

पारुल