मुंबई, 28 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में मराठी नहीं जानने वाले ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का लाइसेंस रद्द करना ‘‘असंवैधानिक’’ होगा और भाषा सीखने के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रवासी चालकों को बुनियादी मराठी सीखने की अनिवार्यता से एक साल की राहत दिए जाने के एक दिन बाद आठवले ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘मराठी नहीं जानने पर किसी का लाइसेंस रद्द करने का फतवा कैसे जारी किया जा सकता है?’’
उन्होंने कहा कि मुंबई की गैर-मराठी आबादी के 60 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पक्ष में मतदान किया था, जिसकी वजह से वह सत्ता में आया।
आठवले ने कहा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ‘‘फतवा’’ जारी किया था कि गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखनी होगी, अन्यथा उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘हम इस फैसले का विरोध नहीं करते। सभी को मराठी आनी चाहिए, लेकिन लाइसेंस रद्द करना संविधान के खिलाफ और अन्यायपूर्ण है। मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और यहां हर कोई आ सकता है।’’
आठवले ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठी सीखने की समयसीमा बढ़ा दी है, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि भाषा सीखने के लिए इतना दबाव बनाना उचित नहीं है।’’
शिवसेना नेता सरनाईक के नेतृत्व वाले परिवहन विभाग ने अप्रैल में घोषणा की थी कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी का बुनियादी ज्ञान होना अनिवार्य होगा और इस नियम का पालन करने के लिए 15 अगस्त की समयसीमा तय की गई थी।
टैक्सी और ऑटो-रिक्शा यूनियनों के फैसले का विरोध करने के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार प्रवासी चालकों को राज्य की प्रमुख भाषा सीखने के लिए एक साल का समय देगी और इस अवधि के दौरान नियम का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
भाषा रविकांत दिलीप
दिलीप