एक साल में 77 लाख से अधिक चांदी आभूषणों पर विशिष्ट पहचान संख्या के साथ हॉलमार्क: बीआईएस

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एक साल में 77 लाख से अधिक चांदी आभूषणों पर विशिष्ट पहचान संख्या के साथ हॉलमार्क: बीआईएस

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  • Publish Date - August 28, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - August 28, 2026 / 07:05 PM IST

नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) चांदी के 77 लाख से अधिक आभूषणों और कलाकृतियों पर पिछले साल सितंबर से छह अंकों वाली विशिष्ट पहचान संख्या (एचयूआईडी) अंकित की जा चुकी है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने यह जानकारी दी।

बीआईएस के अनुसार, चांदी पर हॉलमार्किंग के मामले में दक्षिणी राज्य सबसे आगे हैं।

बीआईएस ने एक बयान में कहा कि एक सितंबर, 2025 को चांदी के लिए एचयूआईडी पोर्टल शुरू किए जाने के बाद अब तक 77 लाख से अधिक चांदी के आभूषणों पर एचयूआईडी अंकित किया जा चुका है।

चांदी के आभूषणों पर ‘हॉलमार्किंग’ अक्टूबर 2005 से स्वैच्छिक है। सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के आभूषणों पर छह अंकों वाली एचयूआईडी अंकित की जा रही है। इससे खरीदार आभूषण की शुद्धता की जांच कर सकते हैं।

वित्त वर्ष 2024-25 में 32 लाख चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्क लगाया गया था, लेकिन उन पर एचयूआईडी अंकित नहीं था।

बीआईएस के अनुसार, हॉलमार्क वाले चांदी के आभूषणों में 925 और 800 शुद्धता वाले आभूषणों की हिस्सेदारी करीब 95 प्रतिशत है। एचयूआईडी शुरू होने के बाद चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

बीआईएस के लिए अब तक 25,000 से अधिक चांदी के आभूषण विक्रेता हॉलमार्किंग के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। वर्तमान में 102 जिलों में चांदी की शुद्धता जांच और हॉलमार्किंग के 341 केंद्र हैं।

हॉलमार्क वाले प्रत्येक आभूषण पर बीआईएस का मानक चिह्न, ‘सिल्वर’, शुद्धता का स्तर और लेजर से अंकित छह अंकों वाली ‘अक्षर-अंक’ पहचान संख्या (एचयूआईडी) होती है।

क्षेत्रवार देखें तो चांदी की हॉलमार्किंग की मात्रा में दक्षिणी क्षेत्र 62 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। इसके बाद पश्चिमी क्षेत्र 18 प्रतिशत और मध्य क्षेत्र 10 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

हॉलमार्क वाले प्रत्येक आभूषण पर बीआईएस का मानक चिह्न, ‘सिल्वर’, शुद्धता का स्तर और लेजर से अंकित छह अंकों वाली अक्षर-अंक पहचान संख्या (एचयूआईडी) होती है।

हॉलमार्किंग से उपभोक्ताओं को कीमती धातु के आभूषण की शुद्धता के बारे में स्वतंत्र पक्ष से प्रमाण मिलता है।

भाषा योगेश रमण

रमण