मुंबई, छह अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को शिवसेना (उबाठा) के इस आरोप पर पलटवार किया कि वह क्षेत्रीय दलों को “बैसाखी” की तरह इस्तेमाल कर रही है और उन्हें विपक्षी गठबंधन में “समान भागीदार” नहीं मान रही।
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने शिवसेना (उबाठा) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसके कार्यकारी संपादक और सांसद संजय राउत कई बार राजनीतिक नेता और पत्रकार की अपनी भूमिकाओं के बीच भ्रमित नजर आते हैं।
सावंत ने ‘एक्स’ पर एक कड़े बयान में कहा कि एक ओर जहां एक पत्रकार का कर्तव्य निष्पक्ष रूप से कमियों को उजागर करना होता है, वहीं दूसरी ओर एक राजनीतिक प्रवक्ता अक्सर विरोधियों को निशाना बनाता है, और इन दोनों भूमिकाओं में भ्रम होने से आपकी जवाबदेही नजरअंदाज हो जाती है।
उन्होंने दावा किया कि राउत को लगता है कि जो वह कहते हैं वही “अंतिम सत्य” है, और वह यह नहीं मानते कि महा विकास आघाडी (एमवीए) जैसे गठबंधन में सभी दलों की अपनी राय होती है, जिन पर घोषणा से पहले चर्चा जरूरी है।
सावंत ने कहा, “एकतरफा फैसले लेना और फिर कांग्रेस नेताओं की ओर देखना गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं है।”
उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा रवैया उचित है।
कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि गठबंधन में समन्वय और संवाद की कमी के कारण मुंबई और चंद्रपुर के प्रमुख नगर निकायों में एमवीए सत्ता से बाहर हो गया।
उन्होंने कहा, “हम भाजपा के खिलाफ ईमानदारी से लड़ रहे हैं और दोषारोपण में नहीं पड़ना चाहते। आत्ममंथन भी उतना ही जरूरी है।”
वहीं, शिवसेना (उबाठा) ने अपने संपादकीय में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा था, “जो दल केंद्र में सरकार बनाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं, उन्हें क्षेत्रीय दलों को केवल बैसाखी की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें समान भागीदार मानना चाहिए।”
संपादकीय में कहा गया कि क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना कमजोरी नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता का संकेत है।
शिवसेना (उबाठा) ने कहा कि अगर कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आना चाहती है, तो राज्यों में मजबूत गठबंधन ही एकमात्र रास्ता है, और उसे यह संदेश देना चाहिए कि वह राष्ट्रीय पार्टी होते हुए भी क्षेत्रीय दलों का सम्मान करती है।
पार्टी राज्यसभा चुनाव और आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस के नेतृत्व से नाराज है।
कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) दोनों राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार सर्वसम्मति से उम्मीदवार बने और निर्विरोध जीत गए।
भाषा जोहेब मनीषा
मनीषा