सरकार से ई20 पर रोक लगाने, जादू-टोना विरोधी कानून बनाने की मांग

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सरकार से ई20 पर रोक लगाने, जादू-टोना विरोधी कानून बनाने की मांग

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  • Publish Date - September 13, 2026 / 05:39 PM IST,
    Updated On - September 13, 2026 / 05:39 PM IST

मुंबई, 13 सितंबर (भाषा) प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से ई20 ईंधन पर रोक लगाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने और देशभर में जादू-टोना विरोधी कानून बनाने की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक नीतियां वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए।

शनिवार को मुंबई में आयोजित ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ के दौरान जारी एक संयुक्त अपील में हस्ताक्षरकर्ताओं ने छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक प्रमाणों की अनदेखी करने वाली सार्वजनिक नीतियों और शिक्षा तथा अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश में कमी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई।

इस अपील पर सीईबीएस, मुंबई के पद्म भूषण से सम्मानित प्रोफेसर एम.एस. रघुनाथन, ‘ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी’ के अध्यक्ष और एसएसबी पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर एस.जी. दानी, एचबीसीएसई-टीआईएफआर के प्रोफेसर अनिकेत सुले, मुंबई विश्वविद्यालय और पूर्व टीआईएफआर से जुड़े प्रोफेसर बी.एम. अरोड़ा, टीआईएफआर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एन. कृष्णन तथा मुंबई प्रेस क्लब के सचिव अनिल कुमार सिंह सहित कई वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए।

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ आंदोलन की शुरुआत वर्ष 2017 में दुनियाभर के करीब 600 शहरों में हुए प्रदर्शनों के बाद हुई थी। इसके बाद भारत में भी इस आंदोलन से जुड़े संगठन हर साल देशभर में रैलियां आयोजित कर वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नीतियां बनाने और अनुसंधान के लिए अधिक धन आवंटित करने की मांग करते रहे हैं।

समूह ने ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) ईंधन नीति को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि इसके पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक जीवन-चक्र आकलन नहीं किया गया है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है। समूह ने चेतावनी दी कि जैव ईंधन के उत्पादन के लिए अधिक पानी की जरूरत वाली खाद्य फसलों का इस्तेमाल करने से खाद्य सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है और भूजल भंडार पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विपक्षी दल, विशेष रूप से आम आदमी पार्टी (आप) और शिवसेना (उबाठा), भी सरकार की ई20 ईंधन नीति की आलोचना करते रहे हैं।

अपील में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की भी मांग की गई। इसमें हाल के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों और देशभर में हुई मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया गया।

वैज्ञानिकों ने नीतिगत फैसलों को व्यापक जलवायु संकट से जोड़ते हुए गंभीर मौसमी घटनाओं, ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश और तेजी से बढ़ रहे प्रजातियों के विलुप्त होने को लेकर चिंता जताई।

अपील में संविधान के अनुच्छेद 51ए(एच) का उल्लेख किया गया है, जिसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य बताया गया है। इसमें अंधविश्वास को बढ़ावा देने का विरोध किया गया है। साथ ही, डायन बताकर उत्पीड़न और झाड़-फूंक के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए जादू-टोना विरोधी सख्त कानून बनाने की मांग की गई है।

‘विज्ञान अपनाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं’ के नारे के साथ आयोजकों ने वैज्ञानिकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और नागरिकों से वैज्ञानिक पद्धति तथा तार्किक सोच को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे भारत के सामूहिक भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

भाषा गोला नरेश

नरेश