‘डिजिटल अरेस्ट’ के झांसे में न आएं, समझें कि यह एक धोखा है : फडणवीस

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‘डिजिटल अरेस्ट’ के झांसे में न आएं, समझें कि यह एक धोखा है : फडणवीस

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  • Publish Date - February 24, 2026 / 01:15 PM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 01:15 PM IST

मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक धोखाधड़ी है और कानूनी रूप से मान्य नहीं है। उन्होंने लोगों से साइबर चोरी से सावधान रहने की अपील की।

‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक ऐसा स्वरूप है, जिसमें धोखेबाज कानून प्रवर्तन या अदालत के अधिकारी या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारी बनकर ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिये पीड़ितों को धमकाते हैं। वे पीड़ितों को बंधक बनाकर उन पर पैसे देने का दबाव बनाते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

राज्य विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के अबू आज़मी द्वारा उठाए गए मुद्दे पर प्रश्नकाल की बहस के दौरान फडणवीस ने कहा कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पीड़ित साइबर धोखाधड़ी की शिकायत हेल्पलाइन 1930 पर महत्वपूर्ण ‘‘गोल्डन आवर’’ (धोखाधड़ी वाले लेनदेन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण समय) के भीतर करते हैं, तो लगभग 90 प्रतिशत धन की वसूली की जा सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं नागरिकों को बताना चाहता हूं कि कानून में डिजिटल गिरफ्तारी जैसा कोई प्रावधान नहीं है। अगर आपको कोई फोन कॉल या वीडियो कॉल आता है जिसमें आपको बताया जाता है कि आप डिजिटल रूप से गिरफ्तार हैं… तो समझ लीजिए कि यह धोखाधड़ी है और 1930 (साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर) पर इसकी सूचना दें।’’

फडणवीस ने चिंता व्यक्त की कि जागरूकता और साइबर सुरक्षा प्रणालियों के बावजूद सेवानिवृत्त आईएएस और रक्षा अधिकारियों सहित कई लोग इसके शिकार हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों में मुख्य साजिशकर्ता विदेशों में होता है, उन देशों में, जिनके साथ भारत का कोई समझौता नहीं है। साथ ही ऑनलाइन माध्यम से धन हस्तांतरण विदेशी देशों के बैंक खातों में किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर पीड़ित ‘गोल्डन आवर’ में 1930 पर सूचना देते हैं, तो कम से कम 90 प्रतिशत पैसा बरामद हो जाता है। हमारे पास साइबर सुरक्षा प्रणाली मौजूद है।’’

भाषा गोला मनीषा

मनीषा