अमरावती, तीन अप्रैल (भाषा) मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी वाईएसआरसीपी द्वारा कथित तौर पर रची गई साजिशों के बावजूद, आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में अमरावती के दर्जे को पूरे देश से सर्वसम्मत समर्थन मिला है।
नायडू ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद भविष्य में कोई भी राजधानी शहर की स्थिति को बदल नहीं सकता।
उन्होंने कहा, “वे (वाईएसआर कांग्रेस) अमरावती को नष्ट करना चाहते थे, लेकिन हमने कानून बनाया। आज पूरा देश अमरावती के साथ खड़ा है। तमाम साजिशों से पार पाते हुए अमरावती विजयी हुई है।”
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को हाल ही में संसद ने पारित किया। इसके तहत अमरावती को दक्षिणी राज्य की राजधानी बनाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि अमरावती परियोजना का विरोध करते हुए विश्व बैंक को पत्र लिखे गए थे और परियोजना के खिलाफ झूठी बातें फैलाई गई थीं, जिनमें इसकी व्यवहार्यता और सुरक्षा के बारे में दावे भी शामिल थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाइयां राजधानी को ‘नुकसान पहुंचाने’ के उद्देश्य से की गई थीं और कहा कि इसी तरह के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की मुहर की मदद से पांच करोड़ लोगों के सपने साकार हुए हैं। भविष्य में कोई भी इसमें कुछ भी बदलाव नहीं कर पाएगा।”
नायडू ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में 50 पार्टियां हैं।
उन्होंने कहा, ‘वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद, और आंध्र प्रदेश की राजधानी से कोई सीधा संबंध न होने के बावजूद, उन सभी ने देश के हितों की रक्षा के लिए अमरावती विधेयक का समर्थन किया।’
नायडू ने विपक्षी दल पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसमें राष्ट्रीय हित की कोई समझ नहीं है और वह आंध्र प्रदेश की प्रगति को लेकर चिंतित नहीं है।
उन्होंने संसद में ‘अमरावती विधेयक’ पारित होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।
तेदेपा प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर मास्टर प्लान के अनुरूप अमरावती की आधारशिला रखी थी।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रतीकात्मक कार्य अमरावती के लिए संसद और पूरे देश के समर्थन को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की परिकल्पना में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे वाले नौ शहरों का एक समूह शामिल है, जिसे वैश्विक वास्तुकारों द्वारा दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषाई आधार पर गठित आंध्र प्रदेश बिना राजधानी के रह गया था, और संसद को भेजा गया प्रस्ताव पारित हो गया, जिससे इसे कानूनी दर्जा मिल गया।
नायडू ने कहा कि अमरावती शिक्षा, रोजगार और ज्ञान के केंद्र के रूप में उभरेगा, जबकि विशाखापत्तनम और तिरुपति में समानांतर विकास कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है और प्रमुख कंपनियां अपनी परिचालन गतिविधियां स्थापित कर रही हैं, साथ ही सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
नायडू ने कहा कि राजधानी के विकास के लिए वर्तमान में 56,000 करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं और ये चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे, जिनके मुख्य पड़ाव 2028 तक पूरे होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरावती को विश्व बैंक, ‘हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एचयूडीसीओ) और अन्य संस्थानों के वित्तीय सहयोग से एक आत्मनिर्भर परियोजना के रूप में डिजाइन किया गया था।
नायडू ने कहा कि राज्य का लक्ष्य 2047 तक 2400 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, जिसमें अमरावती विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार पोलावरम, अमरावती और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं सहित प्रमुख परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण और विकास की गति को बहाल करने के लिए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक योजनाओं को लागू कर रही है।
भाषा तान्या दिलीप
दिलीप