आंध्र प्रदेश सरकार तीन-चार महीने में जनसंख्या प्रबंधन नीति को अंतिम रूप देगी

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आंध्र प्रदेश सरकार तीन-चार महीने में जनसंख्या प्रबंधन नीति को अंतिम रूप देगी

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  • Publish Date - May 29, 2026 / 08:50 PM IST,
    Updated On - May 29, 2026 / 08:50 PM IST

(मधु शर्मा)

अमरावती, 29 मई (भाषा) आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों के साथ परामर्श के बाद तीन-चार महीने में ‘जनसंख्या प्रबंधन नीति’ को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

राज्य सरकार प्रजनन दर में गिरावट से उत्पन्न चिंता के चलते इस नीति को अंजाम देना चाहती है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे गिर गई है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू इस नीति को लेकर काफी सक्रय रहे हैं।

स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव सौरभ गौड़ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम कोई कानून नहीं ला रहे हैं। यह एक चर्चा का ढांचा है, जो परामर्श के बाद तीन से चार महीनों में एक नीति का रूप लेगा।’’

प्रस्तावित नीति का उद्देश्य जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का प्रबंधन करना है।

इस नीति में तीसरे बच्चे के लिए 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के लिए 40,000 रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हो सकता है, जैसा कि हाल में मुख्यमंत्री नायडू द्वारा घोषित किया गया।

गौड़ ने कहा कि राज्य के पास सुधार करने के लिए केवल 2040 तक का जनसांख्यिकीय अवसर है, क्योंकि इसके बाद निर्भरता अनुपात बहुत अधिक बुजुर्ग आबादी की ओर झुक जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए ‘स्वर्ण आंध्र 2047’ विजन के 10 स्वर्ण सिद्धांतों में से तीसरा मार्गदर्शक सिद्धांत जनसंख्या प्रबंधन और मानव संसाधन विकास के प्रति एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण पर केंद्रित है।

गौड़ ने पांच रणनीतिक स्तंभों पर आधारित जनसंख्या प्रबंधन के एक व्यापक जीवनचक्र दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा, ‘‘पहला स्तंभ, ‘मातृत्व’, प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है, जो गर्भाशय निकालने की उच्च दर, बढ़ते सिजेरियन प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण मुद्दों का समाधान करता है।’’

प्रधान सचिव ने कहा,, ‘‘दूसरा स्तंभ, ‘शक्ति’, सहायक और लचीला कार्य वातावरण बनाकर महिला श्रम बल की भागीदारी को बढ़ाना चाहता है, जो वर्तमान में लगभग 21.6 प्रतिशत है।’’

तीसरा स्तंभ, ‘क्षेमा’ बुजुर्गों के कल्याण पर केंद्रित है, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल, वृद्धों की चिकित्सा सेवाओं और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए समुदाय-आधारित सहायता प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है।

उन्होंने कहा कि चौथा स्तंभ ‘संजीवनी’ डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण पर जोर देता है, जबकि पांचवां स्तंभ ‘नैपुण्यम’ उत्पादकता बढ़ाने के लिए कौशल विकास और बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण को ढालने पर केंद्रित है।

प्रधान सचिव ने स्वीकार किया कि प्रजनन दर में गिरावट को रोकना वैश्विक स्तर पर एक कठिन चुनौती है, लेकिन उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के परिणामों में सुधार लाने के प्रति विश्वास व्यक्त किया।

वर्ष 2024 में सत्ता में आने के बाद से, नायडू राज्य में जन्म दर बढ़ाने के लिए जनसंख्या प्रबंधन की सक्रिय रूप से वकालत करते रहे हैं।

भाषा नेत्रपाल वैभव

वैभव