मुंबई, 13 मई (भाषा) भारतीय थलसेना के पूर्व प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान के साथ संवाद संबंधी रुख का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता बेहतर द्विपक्षीय संबंधों को जन्म दे सकती है।
उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि बातचीत का अभिप्राय यह नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते।
नरवणे ने यहां एक कार्यक्रम से इतर ‘पीटीआई-भाषा’से बातचीत में कहा, ‘‘सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं, जिनकी रोटी, कपड़ा और मकान जैसी समस्याएं एक जैसी हैं। आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। जब दोनों देशों के लोगों में मित्रता होगी, तभी दोनों राष्ट्रों में भी मित्रता होगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह सही बात है। लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है।’’
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है और संवाद के लिए हमेशा रास्ता खुला रहना चाहिए।
आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने ‘पीटीआई-वीडियो’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब समय आ गया है कि नागरिक समाज नेतृत्व करे।
नरवणे ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों का जुड़ाव होना चाहिए, चाहे वह ‘ट्रैक टू’ कूटनीति (अनौपचारिक कूटनीति)के माध्यम से हो या फिर किसी खेल आयोजन के माध्यम से।
पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमारे लोगों को भी यह पता होना चाहिए कि सीमा पार रहने वाले लोग कट्टर दुश्मन नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते। भारत शांति की भाषा बोलने वाला देश है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हम बल प्रयोग करने से नहीं हिचकिचाएंगे।’’
भाषा धीरज पवनेश
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