संवैधानिक दायरे में होने पर ही आरक्षण संबंधी मांगों पर कदम उठाएगी सरकार: फडणवीस

संवैधानिक दायरे में होने पर ही आरक्षण संबंधी मांगों पर कदम उठाएगी सरकार: फडणवीस

संवैधानिक दायरे में होने पर ही आरक्षण संबंधी मांगों पर कदम उठाएगी सरकार: फडणवीस
Modified Date: August 12, 2026 / 01:20 am IST
Published Date: August 12, 2026 1:20 am IST

पुणे, 11 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार आरक्षण पर विभिन्न समाजों द्वारा उठाई गई मांगों को सुनेगी, लेकिन निर्णय केवल संविधान और नियमों के दायरे में रहकर ही लिये जाएंगे।

फडणवीस ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘सरकार संविधान के अनुसार चलती है और आगे भी ऐसे ही चलेगी। यह किसी दबाव में या नियमों के बाहर जाकर काम नहीं करती। हालांकि, सरकार हर किसी की बात सुनती है।’

उन्होंने कहा, ‘यदि कोई मांग जनहित में है और संविधान के तहत है, तो उस पर विचार किया जाएगा। यदि यह संविधान के दायरे में नहीं आती है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।’

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी मराठा समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी से जुड़ी आरक्षण मांगों पर नए सिरे से छिड़ी राजनीतिक बहस के बीच आई है।

मराठा और ओबीसी, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों सहित सभी समुदायों को न्याय दिलाने की सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा, ‘संविधान हमें हर किसी का ध्यान रखने का निर्देश देता है। हम एक समाज से छीनकर दूसरे को नहीं देंगे। हमने अब तक सभी का ख्याल रखा है और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।’

एक समुदाय विशेष के हितों के खिलाफ काम करने के आरोपों से मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का बचाव करते हुए फडणवीस ने कहा कि संविधान के तहत किसी मंत्री के लिए यह जरूरी है कि उसे मिली शिकायतों और अभ्यावेदनों को जांच के लिए संबंधित विभाग को भेजे।

उन्होंने कहा, ‘विभाग केवल इस तरह के अभ्यावेदन के आधार पर कोई फैसला नहीं करता, बल्कि वह साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेता है।’

भाषा सुमित अमित

अमित


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