उच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों या व्यक्तियों को 24 अगस्त को महाराष्ट्र बंद का आह्वान करने से रोका

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उच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों या व्यक्तियों को 24 अगस्त को महाराष्ट्र बंद का आह्वान करने से रोका

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  • Publish Date - August 23, 2024 / 07:53 PM IST,
    Updated On - August 23, 2024 / 07:53 PM IST

मुंबई, 23 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों या व्यक्तियों को 24 अगस्त या आगे की किसी तारीख पर प्रस्तावित महाराष्ट्र बंद का आह्वान करने से रोक दिया।

विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) ने ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो बच्चियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में 24 अगस्त को पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया है।

एमवीए में कांग्रेस, राकांपा (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (यूबीटी) शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार बंद को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अगले आदेश तक सभी संबंधित पक्षों (राजनीतिक दल या व्यक्तियों) को 24 अगस्त को तथा इससे आगे की किसी तारीख पर बंद का आह्वान करने से रोका जाता है।’’

पीठ ने बंद के आह्वान को चुनौती देने वाली अधिवक्ता सुभाष झा और गुणरत्न सदावर्ते के माध्यम से शुक्रवार को दायर दो याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।

पीठ ने जुलाई 2004 में उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें उसने कहा था कि बंद या हड़ताल करना असंवैधानिक कृत्य माना जाएगा।

वर्ष 2004 के फैसले में कहा गया था कि ऐसे बंद के मामले में संबंधित राजनीतिक दल कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा और जान-माल या आजीविका के किसी भी नुकसान की भरपाई भी करेगा।

फैसले में कहा गया था कि पुलिस ऐसे बंद में शामिल व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार 2004 के इस फैसले को सख्ती से लागू करेगी।

अदालत ने कहा, ‘‘हम राज्य सरकार और उसके सभी अधिकारियों – मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक और सभी जिला कलेक्टर – को निर्देश देते हैं कि वे 2004 के फैसले में निर्धारित दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करें।’’

राज्य के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि बंद का आह्वान अवैध है।

सराफ ने कहा, ‘‘राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाएगी कि जनता या सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे। राज्य अपना कर्तव्य निभाएगा, लेकिन सभी की संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं, जिनका उन्हें पालन करना चाहिए।’’

अदालत ने सराफ से पूछा कि सरकार ने क्या एहतियाती कदम उठाए हैं और क्या एहतियात के तौर पर कोई गिरफ्तारी की गई है।

सराफ ने कहा कि कुछ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

अधिवक्ता झा और सदावर्ते ने केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि कोई भी राजनीतिक दल राज्यव्यापी बंद का आह्वान नहीं कर सकता है और ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए उच्च न्यायालय के पास पर्याप्त शक्तियां हैं।

अधिवक्ताओं ने मराठा आरक्षण आंदोलन का उदाहरण भी दिया जिसके दौरान व्यापक स्तर पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।

भाषा

शफीक सुरेश

सुरेश