चंद्रपुर में भाजपा ने शिवसेना (उबाठा) के समर्थन से बनाया अपना महापौर

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चंद्रपुर में भाजपा ने शिवसेना (उबाठा) के समर्थन से बनाया अपना महापौर

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 10:46 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 10:46 PM IST

मुंबई, 10 फरवरी (भाषा) गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को उस समय बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब उसकी सहयोगी शिवसेना (उबाठा) और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच अचानक हुए गठबंधन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा का महापौर चुन लिया गया। यह तब हुआ, जब कांग्रेस इस पद पर दावा करने की स्थिति में थी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को एक वोट से हराकर महापौर चुनाव जीत लिया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने भाजपा को समर्थन दिया। शिवसेना (उबाठा) के पार्षद प्रशांत दानव उपमहापौर चुने गए।

इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और महा विकास आघाडी (एमवीए) की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शिवसेना (उबाठा) एमवीए और विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन दोनों में कांग्रेस की एक प्रमुख सहयोगी है।

चंद्रपुर उन कुछ नगर निकायों में से एक है जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर का पद हासिल करने की स्थिति में थी। हालांकि, विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर के नेतृत्व वाले गुटों के बीच गहरे आंतरिक मतभेदों ने भाजपा को अपना महापौर बनाने का अवसर प्रदान कर दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वह विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के बाद इस घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे।

तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और इस झटके के लिए शिवसेना (उबाठा), एआईएमआईएम और वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) को जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस नेता ने पत्रकारों से कहा, “चंद्रपुर महापौर चुनाव में भाजपा को 32 वोट और कांग्रेस को 31 वोट मिले। शिवसेना (उबाठा), एमवीए और विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन की सहयोगी है। उम्मीद थी कि शिवसेना (उबाठा) अपने छह पार्षदों के साथ कांग्रेस को समर्थन देगी लेकिन पार्टी ने भाजपा का साथ देना चुना। इस घटनाक्रम का राज्य पर असर पड़ेगा।”

यहां 66 सदस्यीय नगर निकाय में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी जबकि भाजपा 23 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही जिससे दोनों दलों के बीच प्रतिष्ठित महापौर और उप महापौर पदों को पाने की होड़ मच गई।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने छह सीट जीतीं, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) को तीन, वीबीए को दो और एआईएमआईएम, बसपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली। दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीता।

पंद्रह जनवरी को हुए चुनाव में खंडित जनादेश के बाद चंद्रपुर नगर निकाय में गठबंधन को लेकर सोमवार तक कोई स्पष्टता नहीं थी।

महापौर चुनाव से पहले, शिवसेना (उबाठा) के नेता संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी विपक्ष में बैठना पसंद करेगी और भाजपा का कभी समर्थन नहीं करेगी।

हालांकि, परिणाम आने के बाद, शिवसेना (उबाठा) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना हुआ प्रतीत होता है।

पार्टी के स्थानीय नेताओं ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया।

चंद्रपुर जिला शिवसेना (उबाठा) के अध्यक्ष संदीप गिरहे ने बताया कि स्थानीय नेताओं ने महापौर पद के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार से मुलाकात की थी, लेकिन कांग्रेस ने पांच साल के लिए यह पद देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद शिवसेना (उबाठा) ने ‘विकास के हित में’ भाजपा से बातचीत शुरू की।’’

गिरहे ने कहा कि वह शिवसेना (उबाठा) के नेता वरुण सरदेसाई के संपर्क में रहे और नेतृत्व ने स्थानीय इकाइयों को संगठनात्मक एकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

उप महापौर दानव ने पुष्टि की कि भाजपा और शिवसेना (उबाठा) के बीच हुई चर्चा के परिणामस्वरूप एक समझौता हुआ जिसके तहत भाजपा को महापौर का पद और शिवसेना (उबाठा) को उपमहापौर का पद मिला।

भाजपा के महापौर चुनाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के समर्थन के कारण भाजपा को बढ़त मिली, जबकि प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) मतदान के दौरान अनुपस्थित रही।

सपकाल ने कहा, ‘‘वंचित बहुजन आघाडी के साथ हमने नगर निकाय चुनावों में वास्तविक गठबंधन किया और अगर उसने कांग्रेस का समर्थन किया होता तो हमारा उम्मीदवार जीत जाता। पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई।’’

चंद्रपुर कांग्रेस में गुटबाजी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पार्टी के पार्षद एकजुट हैं और उन्होंने चंद्रपुर में कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेदों को सुलझा लिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना (उबाठा), एआईएमआईएम और वीबीए की वजह से ही भाजपा अपना महापौर बना सकी।’’

शिवसेना (उबाठा) पर निशाना साधते हुए, शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के पार्षदों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अब कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते।

भाषा नोमान नेत्रपाल

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