स्ट्रीमिंग के दौर में काम करना शानदार: अलग-अलग किरदार निभाने पर सिद्धार्थ ने कहा

स्ट्रीमिंग के दौर में काम करना शानदार: अलग-अलग किरदार निभाने पर सिद्धार्थ ने कहा

स्ट्रीमिंग के दौर में काम करना शानदार: अलग-अलग किरदार निभाने पर सिद्धार्थ ने कहा
Modified Date: September 30, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: September 30, 2026 12:39 pm IST

मुंबई, 30 सितंबर (भाषा) अभिनेता सिद्धार्थ ने कहा कि वह स्ट्रीमिंग के दौर में काम करने को अपनी खुशनसीबी मानते हैं, जहां कलाकारों को एक-दूसरे से बिल्कुल अलग किरदार निभाने की आजादी मिल रही है।

अभिनेता ने अपनी हालिया दो स्ट्रीमिंग परियोजनाओं- ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ और ‘लस्ट स्टोरीज 3’ का उदाहरण देते हुए कहा कि नेटफ्लिक्स जैसे स्ट्रीमिंग मंचों की वजह से उन्हें 90 दिन के भीतर अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने का अवसर मिला।

फिक्की फ्रेम्स सम्मेलन के पहले दिन एक चर्चा के दौरान सिद्धार्थ ने कहा, “मुझे जो काम मिलता है और जिन लोगों का मुझ पर विश्वास है, उसके लिए मैं आभारी हूं। अजय आहूजा और बदरू में ज्यादा अंतर नहीं है, क्योंकि जिस निर्देशक ने मुझे अजय आहूजा का किरदार दिया, उसने मुझे उसके नजरिये से सोचने को कहा और विशाल भारद्वाज ने मुझे बदरू दिया। आप पर उनका भरोसा और विश्वास समान होता है।”

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में सिद्धार्थ ने युद्ध नायक अजय आहूजा का किरदार निभाया था, जबकि ‘लस्ट स्टोरीज 3’ के भारद्वाज के निर्देशन वाले हिस्से में उन्होंने बदरू की भूमिका निभाई, जो एक महिला की कल्पना का विषय बनता है।

‘लस्ट स्टोरीज’ के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने कहा कि उन्हें महिलाओं की इच्छाओं पर आधारित यह विचार “प्रगतिशील” लगा।

उन्होंने कहा, “यह इस बारे में बात करता है कि महिलाएं क्या चाहती हैं, जो चर्चा का उतना ही महत्वपूर्ण विषय है। मैं आभारी हूं कि हम ऐसे स्ट्रीमिंग दौर में रह रहे हैं, जहां आपको काम मिल सकता है।”

सिद्धार्थ फिक्की फ्रेम्स में आयोजित ‘दर्शक क्या चाहते हैं’ विषय पर पैनल चर्चा में शामिल हुए। इस चर्चा में फिल्मकार सुरेश त्रिवेणी, फराह खान, अभिनेता रितेश देशमुख, लेखक-निर्माता-शो रनर अभिजीत सिंह परमार और नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट उपाध्यक्ष मोनिका शेरगिल भी शामिल थीं।

फिल्म ‘जलसा’ और ‘मां बहन’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले त्रिवेणी ने कहा कि दर्शक क्या देखना चाहते हैं, यह तय करने के लिए उद्योग को केवल एल्गोरिद्म और अनुमान पर निर्भर रहने से आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा, “एल्गोरिद्म अतीत की बात है, अब हमें एल्गोरिद्म को समझकर चीजों का अनुमान लगाने की जरूरत है। हमें साहसी बनने की जरूरत है, लेकिन हम अभी भी सतर्क हैं।”

फराह खान ने रियलिटी शो ‘लॉक अप’ की मेजबानी के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मनोरंजन करना उनके स्वभाव का हिस्सा है और वह किसी को ऊबने नहीं दे सकतीं।

उन्होंने कहा कि ‘लॉक अप’ की शुरुआत उनके लिए थोड़ी अलग थी, क्योंकि यह शो मानवीय स्वभाव, लोगों के रहस्यों और कमजोरियों पर आधारित था।

रितेश देशमुख, जो ‘लॉक अप’ के सह-मेजबान थे, ने कहा कि इस शो ने प्रतिभागियों को मानवीय स्वभाव को समझने का अवसर दिया।

उन्होंने कहा, “‘लॉक अप’ सबसे अच्छे अनुभवों में से एक रहा। यह नौकरी जैसा नहीं लगा, बल्कि छुट्टी जैसा महसूस हुआ। हमने खुद भी बहुत कुछ सीखा। यह शो मानवीय स्वभाव और मशहूर हस्तियों के एक-दूसरे के सामने अपनी कमजोरियां दिखाने के बारे में था।”

कार्यक्रम में मोनिका शेरगिल ने ‘लॉक अप: सच या सजा’ के दूसरे सीजन की वापसी की घोषणा की।

भाषा वैभव

वैभव


लेखक के बारे में