मुंबई, 16 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बुधवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से गणेश उत्सव के दौरान मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन को वापस लेने की अपील की और कहा कि मुद्दों का समाधान बातचीत एवं विचार-विमर्श के जरिए किया जा सकता है।
विखे पाटिल ने कहा, ‘आंदोलन को रोकने के लिए बल प्रयोग करने की बिल्कुल कोई योजना नहीं है। इस मुद्दे का समाधान बातचीत और चर्चा के जरिए किया जा सकता है। हम उन लोगों से बात कर रहे हैं, जिन्होंने आरक्षण के मुद्दे का अध्ययन किया है।’
उन्होंने कहा कि सरकार समुदाय और उसके प्रतिनिधियों के साथ जब भी जरूरत हो, बातचीत के लिए तैयार है।
जल संसाधन मंत्री पाटिल ने पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर समुदाय की आलोचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के कुछ सदस्यों को लगा कि जिस शिंदे पर उन्होंने भरोसा जताया था, उन्होंने उन्हें ‘धोखा दिया’।
उन्होंने कहा, ‘अगर उन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है, तो मेरा मानना है कि उन्हें इस बात को अपने दिल से निकाल देना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि शिंदे ने इस मुद्दे पर काफी पहल की थी।
मराठा आरक्षण मुद्दे पर सरकार की मंत्रिमंडलीय उप-समिति के प्रमुख विखे पाटिल ने दावा किया कि उस समय करीब 5,500 बच्चों को अवसर दिया गया था, जबकि अवमानना की कार्यवाही शुरू होने की आशंका थी और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा, ‘बहुत कुछ किया गया। मुझे नहीं लगता कि समुदाय को यह महसूस करने से कोई लाभ होगा कि उसके साथ धोखा हुआ है।’
मंत्री के अनुसार, सरकार ने समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए कई योजनाएं शुरू की थीं और भविष्य में बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए हैं।
विखे पाटिल ने कहा, ‘हमारी केवल इतनी अपेक्षा है कि गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। वे पुणे से मुंबई की यात्रा करने वाले हैं और हम नहीं चाहते कि कोई अप्रिय घटना हो।’
उन्होंने उत्सव को देखते हुए जरांगे से आंदोलन रोकने की अपील की।
बुधवार को जरांगे का अनशन 19वें दिन में प्रवेश कर गया। वह बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे महाराष्ट्र के बीड जिले के पाटोदा पहुंचे। उन्होंने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से करीब 14 घंटे पहले यात्रा शुरू की थी। उनके 19 सितंबर को अहिल्यानगर, पुणे और रायगढ़ जिले के खोपोली से होते हुए मुंबई पहुंचने का कार्यक्रम है।
पिछले साल आजाद मैदान में जरांगे के अनशन के दौरान हजारों समर्थकों के मुंबई पहुंचने से दक्षिण मुंबई का जनजीवन ठप हो गया था। सरकार द्वारा उनकी आठ में से छह मांगें स्वीकार किए जाने और कुनबी वर्गीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद दो सितंबर, 2025 को आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
हालांकि, इस बार भाजपा नीत राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने गणेश उत्सव के दौरान आंदोलन करने की जरूरत पर भी सवाल उठाया था।
भाषा अमित नरेश
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