मुंबई, छह अगस्त (भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में राजनीतिक कारणों से कई जाति प्रमाणपत्र रद्द किए जा रहे हैं। वहीं, राज्य के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इस तरह का हस्तक्षेप संभव नहीं है।
जरांगे ने मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर जालना जिले के अंतरवाली सराटी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार कई कुनबी (ओबीसी) प्रमाणपत्र रद्द करके मराठा आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने में सुविधा दी और बाद में एक सुनियोजित रणनीति के तहत उन्हें रद्द किया जाना सुनिश्चित किया। उनका दावा था कि इसका निशाना मराठा समुदाय के निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं।
जरांगे ने यह भी आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन का विरोध करने वाले लोग मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच बना चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्व मंत्री बावनकुले ने अधिकारियों को प्रमाणपत्र रद्द करने के निर्देश दिए और इस प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक पत्राचार को मंजूरी दी।
जरांगे लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि पात्र मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषक समुदाय है, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार समुदाय के खिलाफ कथित अन्यायपूर्ण कार्रवाई जारी रखती है तो मराठा समुदाय वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ‘‘सबसे बड़ा बदला’’ लेगा और कई विधायकों की हार सुनिश्चित कर सकता है।
हालांकि, बावनकुले ने कहा कि सरकार या उसके किसी मंत्री को जाति सत्यापन समिति के कामकाज में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित करने वाली यह समिति अर्द्ध-न्यायिक निकाय है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जाति सत्यापन समिति स्वतंत्र रूप से काम करती है। न तो सरकार और न ही किसी मंत्री को समिति को बुलाने या उसे निर्देश देने का अधिकार है। समिति दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेती है।’’
बावनकुले ने कहा कि जाति सत्यापन समिति के आदेश अंतिम नहीं होते और कोई भी पीड़ित व्यक्ति बंबई उच्च न्यायालय में अपील दायर करके अंतरिम राहत का अनुरोध कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह मेरे नार्को परीक्षण की मांग कर सकते हैं, लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि राज्य सरकार द्वारा गठित जाति सत्यापन समिति के कामकाज में कोई भी सरकारी अधिकारी हस्तक्षेप नहीं कर सकता।’’
जरांगे के इस दावे पर कि अगले चुनाव में कई विधायक हार जाएंगे, बावनकुले ने कहा कि वह इस तरह की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।
भाषा अमित पवनेश
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