ठाणे, 26 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े 2020 के मामले में एक ही परिवार के चार सदस्यों को बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका और सुनवाई के दौरान गवाह मुकर गए।
सत्र न्यायाधीश आर. डी. सावंत ने शुक्रवार को पीड़िता के पति दीपक विजयबहादुर यादव (40), ससुर विजयबहादुर यादव (66), सास इसरावती (66) और ननद नीलम (36) को बरी कर दिया।
इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (क्रूरता), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 304बी (दहेज के कारण मौत) के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कल्पना यादव की शादी आठ जुलाई 2016 को दीपक यादव से हुई थी और विवाह के बाद वह ठाणे के पाटिलवाड़ी स्थित अपने ससुराल में रहती थीं।
पुलिस ने शिकायत के हवाले से बताया कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वाले कल्पना को परेशान करने लगे और एक फ्लैट खरीदने के लिए दो लाख रुपये की मांग करने लगे, जिससे तंग आकर उसने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।
हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता सहित अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह अपने बयान से मुकर गए।
पिता ने अपनी गवाही में कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हो गया है और वे मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने उन पर लगाए गए अपराध को अंजाम दिया है। इसमें कोई शक नहीं कि कल्पना की मौत शादी के सात साल के भीतर हुई थी। हालांकि, जैसा कि आरोप लगाया गया है, दहेज से जुड़ा कोई सबूत न होने की वजह से यहां साक्ष्य अधिनियम की धारा 113बी लागू नहीं की जा सकती।”
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा, जिस कारण सभी चार आरोपियों को बरी किया जाता है।
भाषा जितेंद्र सुभाष
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