मुंबई, 25 फरवरी (भाषा) बच्चों में ‘डिजिटल लत’ और इसके दुष्परिणामों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, महाराष्ट्र सरकार ने इस मुद्दे का अध्ययन करने और उपाय सुझाने के लिए एक विशेषज्ञ कार्यबल गठित करने का निर्णय लिया है। राज्य के आईटी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस कार्यबल में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे और यह अपनी रिपोर्ट विधानमंडल के अगले सत्र से पहले प्रस्तुत करेगा।
मंत्री ने एक अध्ययन का हवाला भी दिया जिसमें शहरी और ग्रामीण महाराष्ट्र में बच्चों के बीच गेमिंग की लत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया गया था।
वह विधान परिषद सदस्य निरंजन दावखरे और संजय केनेकर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे, जिसमें बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और इसके प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
विभिन्न दलों के सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया, जहां बच्चों के लिए गेमिंग ऐप और सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु प्रतिबंधों के संबंध में प्रश्न उठाए गए, और यह भी मुद्दा उठा कि क्या नाबालिगों को लक्षित करने वाले डिजिटल विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
शेलार ने अपने लिखित बयान में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को दो फरवरी को इस मामले की पड़ताल के लिए एक कार्यबल गठित करने के निर्देश जारी किए गए थे।
उन्होंने बताया कि राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के लगभग चार करोड़ बच्चे हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के हैं इसलिए, उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य गंभीर चिंता का विषय है।
मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से ले रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय विशेषज्ञ कार्यबल में शिक्षाविद, मनोचिकित्सक, बाल परामर्शदाता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, डॉक्टर, कानूनी विशेषज्ञ और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
भाषा शफीक अविनाश
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