जालना, चार सितंबर (भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को कहा कि वह कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उनका अनशन शुक्रवार को सातवें दिन भी जारी रहा।
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में संवाददाताओं से बातचीत में जरांगे ने मांग की कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में सरकार 12 सितंबर तक शासनादेश (जीआर) जारी करे।
उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को गांव में मराठा समुदाय की एक बैठक आयोजित की जाएगी।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अब तक कई बार अनशन कर चुके जरांगे ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे से मराठों को आरक्षण देने का विरोध कर रहे ओबीसी समुदाय के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल पर भी निशाना साधा।
जरांगे ने कहा, ‘‘मुझे लगा था कि उम्र के साथ समझदारी आएगी, लेकिन बुजुर्ग होने के बाद भी उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मराठा समुदाय भी महायुति से दूर हो जाएगा… क्या महायुति के पीछे सिर्फ छगन भुजबल के वोट हैं?’’
जरांगे ने कहा कि मराठों को आरक्षण देने से ओबीसी समुदाय को कोई खतरा नहीं होगा। उन्होंने धनगर समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण की मांग का भी समर्थन किया।
उन्होंने राज्य सरकार की ओर से हाल में गठित मराठा प्रकोष्ठ और इस मुद्दे से निपटने के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि इससे स्थायी समाधान कैसे निकलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को हमारी मांगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। हमने सरकार को तीन साल का समय दिया था।’’
जरांगे ने कहा कि सरकार को हैदराबाद स्टेट गजट लागू करना चाहिए, जिसमें मराठा परिवारों को कृषक समुदाय कुनबी के रूप में पहचाने जाने संबंधी रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि इसके आधार पर जारी होने वाले प्रमाणपत्रों के लिए जाति सत्यापन कैसे किया जाएगा।
कुनबी एक कृषि समुदाय है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आता है और उसे सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलता है। जरांगे पात्र मराठों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण मिल सके।
भाषा रवि कांत दिलीप
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