(फाइल फोटो के साथ)
जालना, 31 अगस्त (भाषा) मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को समुदाय के लोगों से अपील की है कि यदि महाराष्ट्र सरकार 12 सितंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं करती है तो वे ‘गुरिल्ला रणनीति’ अपनाते हुए चुपचाप मुंबई की ओर बढ़ें और बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहें।
उनकी यह अपील महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठाओं की ‘कानूनी सम्मत’ मांगों पर चर्चा करने की इच्छा जताने के एक दिन बाद आई है। भूख हड़ताल पर बैठे जरांगे समुदाय के सदस्यों के लिए कुनबी जाति प्रमाण पत्र की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
पिछले साल 29 अगस्त को आजाद मैदान में जरांगे के विरोध-प्रदर्शन के कारण यातायात जाम हो गया था। राज्य सरकार द्वारा आठ में से छह मांगें मान लेने और कुनबी जाति प्रमाण-पत्र जारी करना शुरू करने के बाद दो सितंबर को यह प्रदर्शन वापस ले लिया गया था।
इस बार जालना जिले के अंतरवाली सराटी में जरांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रही। रविवार को रक्तशर्करा स्तर गिरने के बाद चिकित्सकों की सलाह के बावजूद जरांगे ने ‘इंट्रावेनस फ्लूइड’ (रक्त वाहिकाओं में दिया जाने वाला रासायनिक तरल पदार्थ) लेने से इनकार कर दिया।
उन्होंने भावुक अपील भी की कि अगर भूख हड़ताल के दौरान उनकी मौत हो जाती है, तो भी उनके शव को आंदोलन के लिए मुंबई ले जाया जाए।
उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार की ओर से जरांगे से बातचीत के लिए अभी तक कोई आधिकारिक संपर्क नहीं किया गया है।
जरांगे ने दावा किया है कि मराठों के कुनबी वंशावली संबंध के 58 लाख रिकॉर्ड मिले हैं और सरकार इस संख्या को कम करने की कोशिश कर रही है। उनकी मुख्य मांग मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी के तौर पर मान्यता दिलाना है, ताकि उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी को मिलने वाले लाभ मिल सकें।
अन्य मांगों में सतारा गजट के आधार पर आरक्षण, पूरे महाराष्ट्र में आरक्षण आंदोलन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लेना और पिछले आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी और आर्थिक मुआवजा देना शामिल है।
जरांगे ने सोमवार को यहां प्रदर्शन स्थल पर लोगों से कहा कि समुदाय को मुंबई जाते समय ‘गुरिल्ला रणनीति’ अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अपनी गाड़ियों पर झंडे न लगाएं। अभी से चुपचाप मुंबई जाना शुरू करें। चुपचाप रहने की आदत डालें और बिना किसी को पता चले मुंबई में प्रवेश करें कि मराठा आ गए हैं।’’
जरांगे ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे आजाद मैदान या मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के बाहर तुरंत इकट्ठा होने के बजाय मुंबई में अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के साथ रहें।
उन्होंने कहा, ‘‘हम मुंबई जाने की तैयारी कर रहे हैं। मैं मराठा समुदाय से अपील करता हूं कि वे 12 सितंबर तक धीरे-धीरे मुंबई पहुंचें और अपनी सुविधा के अनुसार वहां ठहरें। अधिकारियों को यह पता नहीं चलना चाहिए कि मराठा लोग मुंबई पहुंच गए हैं।’’
जरांगे ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और आगजनी या हिंसा से दूर रहने को भी कहा।
भाषा राजकुमार वैभव
वैभव