महाराष्ट्र में वाणिज्यिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य : सरनाईक

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महाराष्ट्र में वाणिज्यिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य : सरनाईक

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 09:11 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 09:11 PM IST

मुंबई, 27 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में सभी वाणिज्यिक यात्री वाहनों के चालकों को मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान होना अनिवार्य है, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग भाषा सीखने से इनकार करेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरनाईक ने कहा कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियनों की यह मांग कि गैर-मराठी चालकों को भाषा सीखने के लिए एक निश्चित समय दिया जाए, उचित है और इस पर विचार किया जा रहा है।

मंत्री की यह टिप्पणी विभिन्न पक्षों से सरकार की उस योजना को स्थगित करने की अपील के बीच आई है जिसके तहत ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए एक मई से मराठी भाषा अनिवार्य की जानी है।

मंत्रालय में आयोजित एक बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भाषा संबंधी आवश्यकता पर दृढ़ है, क्योंकि चालक नियमित रूप से यात्रियों के साथ बातचीत करते हैं और उन्हें बुनियादी मराठी में संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य में सभी वाणिज्यिक यात्री वाहनों के चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य है, हालांकि उन्होंने वाहनों की श्रेणियों का उल्लेख नहीं किया।

यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर, श्रमिक नेता शशांक राव और हाजी अराफात शेख, और शिवसेना नेता संजय निरुपम, साथ ही ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित थे।

सरनाईक ने कहा कि हालांकि महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है और रोजगार सृजन सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है, लेकिन राज्य में व्यापार करने और जनता के साथ व्यवहार करने के दौरान मराठी का बुनियादी ज्ञान होना न्यूनतम अपेक्षा है।

उन्होंने कहा, “राज्य भाषा होने के नाते, मराठी का सम्मान किया जाना चाहिए, और गैर-मराठी भाषी चालकों को इसे सीखना चाहिए।”

मंत्री ने कहा कि सरकार चालकों को रोजमर्रा के संवाद के लिए आवश्यक बुनियादी मराठी सिखाने के लिए कदम उठा रही है, और मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसे संगठनों के साथ-साथ लेखकों ने भी इस पहल का समर्थन किया है।

उन्होंने आगे कहा कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी संघों ने भी सहयोग करने पर सहमति जताई है।

भाषा प्रशांत माधव

माधव