एमपीएससी ने प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आने के बाद औषधि निरीक्षक भर्ती प्रक्रिया रद्द की

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एमपीएससी ने प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आने के बाद औषधि निरीक्षक भर्ती प्रक्रिया रद्द की

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 04:52 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 04:52 PM IST

मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में औषधि निरीक्षक समूह-बी के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है। यह फैसला इस साल की शुरुआत में हुई परीक्षा में कथित अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद किया गया।

आयोग ने मंगलवार को इन पदों के लिए नए सिरे से परीक्षा कराने का फैसला किया। आयोग ने कहा कि यह कदम सभी अभ्यर्थियों को निष्पक्ष और समान अवसर देने तथा परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है।

भर्ती प्रक्रिया रद्द होने का मतलब है कि परीक्षा में सफल होने और उसके बाद साक्षात्कार देने वाले अभ्यर्थियों को भी नए सिरे से परीक्षा देनी होगी। कुल 485 अभ्यर्थी इन पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र पाए गए थे।

एमपीएससी को इस साल 22 मार्च को हुई परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें मिली थीं।

आयोग ने एक बयान में कहा कि शिकायतों में दावा किया गया था कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या प्रश्न मिल गए थे और बाद में यह सामग्री सोशल मीडिया तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रसारित की गई।

भर्ती प्रक्रिया 29 जुलाई, 2025 को जारी विज्ञापन के माध्यम से शुरू की गई थी। परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों में आयोजित की गई थी। आयोग ने बताया कि परीक्षा का परिणाम 12 जून को घोषित किया गया, जिसके बाद 506 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र पाए गए।

उसने बताया कि इनमें से 488 अभ्यर्थी एक से 22 जुलाई के बीच आयोजित साक्षात्कार में शामिल हुए। साक्षात्कार पूरा होने के बाद एमपीएससी ने 488 अभ्यर्थियों की अस्थायी सामान्य मेरिट सूची जारी की, जिनमें 485 अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए पात्र और तीन अपात्र पाए गए।

हालांकि, परीक्षा के आयोजन को लेकर आयोग को 22 से 26 जुलाई के बीच कुछ अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से ई-मेल के जरिए शिकायतें मिलीं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या प्रश्न मिल गए थे। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रश्नों से संबंधित सामग्री सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर उपलब्ध पाई गई।

एमपीएससी ने आरोपों की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए 27 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त से संपर्क किया और शिकायतों की जांच का अनुरोध किया।

इसके बाद मुंबई पुलिस की अपराध जांच शाखा ने प्रारंभिक जांच की। अपराध जांच शाखा के पुलिस उपायुक्त ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपी।

एमपीएससी के अनुसार, पुलिस की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया संकेत मिला कि एक अभ्यर्थी को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिला था और उसने इससे लाभ उठाया था।

आयोग ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का फैसला लेने से पहले उसने जांच में सामने आए निष्कर्षों की गंभीरता को ध्यान में रखा। उसने कहा कि नए सिरे से होने वाली परीक्षा में शामिल होने के पात्र अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। पुन: परीक्षा के लिए उनसे कोई परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।

आयोग ने बताया कि पुन: परीक्षा की तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा बाद में अलग से अधिसूचना के माध्यम से की जाएगी।

इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने कथित प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा, ‘‘जब सरकार को पता था कि प्रश्नपत्र लीक हो गया है, तो इस मामले में तुरंत प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई?’’

देशपांडे ने दावा किया कि उत्तर महाराष्ट्र के नंदुरबार का एक कोचिंग संस्थान संचालक प्रश्नपत्र लीक के पीछे था।

मनसे नेता ने दावा किया कि संबंधित कोचिंग संचालक को नोटिस दिया गया था, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में वह फरार हो गया।

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश