जनगणना के बाद भारत में मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया की आबादी के बराबर हो सकती है: रीजीजू

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जनगणना के बाद भारत में मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया की आबादी के बराबर हो सकती है: रीजीजू

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  • Publish Date - May 9, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - May 9, 2026 / 09:33 PM IST

मुंबई, नौ मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कहा कि जनगणना के बाद भारत में मुस्लिम आबादी लगभग इंडोनेशिया के बराबर रहने की संभावना है।

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री रीजीजू ने यहां एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘देश में मुस्लिम आबादी संभवतः इंडोनेशिया की कुल आबादी के लगभग बराबर होगी। जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद यही संभावित परिणाम होगा।’’

उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 में दस-वर्षीय जनगणना नहीं हो सकी, इसलिए जनसंख्या में वृद्धि हुई होगी।

रीजीजू ने कहा, ‘‘चाहे किसी (समुदाय की) की संख्या कितनी भी हो, सभी भारतीय हैं।’

पारसी समुदाय की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश में उनकी संख्या लगभग 52,000 से 55,000 के बीच है।

उन्होंने आगे कहा कि पारसी भारत का सबसे छोटा अल्पसंख्यक समुदाय है और सरकार उनकी सुरक्षा और उनकी संख्या में और कमी न आने देने के लिए काम कर रही है।

रीजीजू ने देश में अल्पसंख्यकों के खतरे में होने के दावों को भी खारिज करते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक संगठन मुसलमानों और ईसाइयों के बीच भय पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के समक्ष सभी नागरिक समान हैं और किसी के साथ धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा का सरकार बनाना देश के लिए एक जीत है, क्योंकि यह बांग्लादेश से सटी सीमा वाला एक बेहद संवेदनशील राज्य है, जहां से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की जीत राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

भाषा अमित पवनेश

पवनेश