मुंबई, एक नवंबर (भाषा) जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल द्वारा अपनी हिस्सेदारी कम करने में ‘‘प्रतिरोध’’ और ‘‘निजी आर्थिक लाभ के लिए लगातार धन की निकासी’’ के कारण एयरलाइन का पतन हुआ। प्रवर्तन निदेशालय ने एक अदालत के समक्ष दाखिल अपने आरोपपत्र में यह दावा किया है।
एजेंसी ने 538 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में मंगलवार को आरोपपत्र दाखिल किया था, जिस पर अदालत ने बुधवार को संज्ञान लिया।
ईडी ने दावा किया कि एयरलाइन बंद होने से बच सकती थी अगर गोयल ने अपने ‘‘गुप्त उद्देश्य’’ को अलग रखा होता और पेशेवरों को कंपनी के परिचालन नकदी प्रवाह को बदलने के लिए त्वरित और रणनीतिक निर्णय लेने की अनुमति दी होती।
इसमें आरोप लगाया गया कि गोयल ने घाटे में चल रही जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (जेआईएल) से खुले तौर पर धन की हेराफेरी की और भारत व विदेश दोनों में अपने परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाले संबंधित प्रतिष्ठानों में पैसा लगाना जारी रखा।
जांच एजेंसी ने मामले के संबंध में मंगलवार को नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता गोयल और चार कंपनियों – जेआईएल, जेट एयर प्राइवेट लिमिटेड, जेट एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड और जेट एयरवेज एलएलसी, दुबई के खिलाफ अपना आरोपपत्र दाखिल किया था।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश एम.जी. देशपांडे ने बुधवार को आरोप पत्र पर संज्ञान लिया।
गोयल ने ईडी को दिए अपने बयान में कहा है कि जेआईएल को इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि भारत में करों के साथ-साथ उच्च ईंधन की कीमतों और हवाई अड्डे के शुल्क समेत अन्य प्रमुख कारकों के कारण इसे भारी नुकसान हुआ था।
हालांकि, अपने आरोप पत्र में ईडी ने कहा कि उसकी जांच से पता चला है कि जेआईएल के पतन के लिए जिन कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एयरलाइन के मामलों को चलाने में शीर्ष अधिकारियों द्वारा लिए गए अतार्किक निर्णय, अपनी हिस्सेदारी को कम करने में गोयल का ‘‘प्रतिरोध’’ और व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए जेआईएल से लगातार धन की हेराफेरी शामिल है।
भाषा शफीक माधव
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