मुंबई, 21 अगस्त (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए एक नया नोटिस भेजा है। उन्होंने दावा किया है कि 26 फरवरी को हुआ संगठनात्मक चुनाव अमान्य था।
इस घटनाक्रम पर टिप्पणी के लिए संपर्क करने पर राकांपा प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि सिंह अब पार्टी के पदाधिकारी नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जो भी बातचीत करनी होगी, वह हम निर्वाचन आयोग के साथ करेंगे।”
सिंह के वकील की ओर से 17 अगस्त को एक नया नोटिस तब भेजा गया, जब पिछले महीने रांकापा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और सुनेत्रा के चयन को चुनौती देने वाले सिंह के पहले नोटिस का कोई महत्व नहीं है।
सुनेत्रा, प्रफुल्ल पटेल और पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजे गए नये नोटिस में कहा गया है कि उन्हें नौ जुलाई के पिछले नोटिस में की गई मांगों को 15 दिन के भीतर पूरा करने का आखिरी मौका दिया जा रहा है।
इसमें कहा गया है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सिंह 26 फरवरी के चुनाव को अमान्य घोषित कराने के लिए किसी उचित मंच का रुख कर सकते हैं और अन्य कानूनी विकल्प आजमा सकते हैं।
नोटिस में सिंह ने 26 फरवरी को हुए चुनाव के सिलसिले में निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को भेजे गए पत्रों और उनके आधार पर दाखिल किए गए दस्तावेजों को भी वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और पदाधिकारियों की “संशोधित अंतिम सूची” को अमान्य घोषित किया जाए और पार्टी के संविधान के अनुसार नये सिरे से संगठन का चुनाव कराया जाए।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 26 फरवरी को संपन्न चुनाव के लिए कोई विधिवत गठित केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकरण या निर्वाचन अधिकारी नहीं था और सिंह तथा अन्य राष्ट्रीय नेताओं को उम्मीदवार नामित करने, चुनाव लड़ने या वोट देने का मौका नहीं दिया गया।
जनवरी में एक विमान हादसे में राकांपा प्रमुख और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के बाद से पार्टी नेतृत्व को लेकर अंदरूनी कलह से जूझ रही है।
भाषा पारुल नरेश
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