अजित पवार की मृत्यु वाले दिन किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए गए: अल्पसंख्यक विभाग

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अजित पवार की मृत्यु वाले दिन किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए गए: अल्पसंख्यक विभाग

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  • Publish Date - February 24, 2026 / 01:20 PM IST,
    Updated On - February 24, 2026 / 01:20 PM IST

मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विकास विभाग ने स्पष्टीकरण दिया कि 28 जनवरी को जिस दिन तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, उस दिन न तो किसी नयी फाइल पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए गए थे और न ही अल्पसंख्यक दर्जा देने का कोई प्रमाण पत्र वितरित किया गया था।

यह स्पष्टीकरण पवार की मृत्यु के बाद कुछ दिन में 75 शिक्षण संस्थानों को कथित तौर पर जल्दबाजी में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। पवार उस समय अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे।

अल्पसंख्यक दर्जा मिलने से शैक्षणिक संस्थानों को महत्वपूर्ण नियामक लाभ प्राप्त होते हैं, जिनमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम के कुछ प्रावधानों से छूट शामिल है, जैसे कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण। इसके अलावा अनुदान और नियुक्तियों व आंतरिक प्रबंधन में अधिक प्रशासनिक स्वायत्तता भी प्राप्त होती।

पवार और चार अन्य लोगों की 28 जनवरी की सुबह पुणे जिले के बारामती में हुए विमान हादसे में मौत हो गयी थी।

सोमवार देर रात ‘एक्स’ पर जारी एक विस्तृत बयान में अल्पसंख्यक विकास विभाग ने कहा कि 28 जनवरी को विभाग के माध्यम से किसी भी नयी फाइल या प्रमाण पत्र पर डिजिटल हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। विभाग ने यह भी कहा कि उस दिन कोई प्रमाण पत्र नहीं सौंपा गया था।

विभाग ने कहा कि अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है, जो 27 मई, 2013 के सरकारी संकल्प में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सख्ती से की जाती है। विभाग ने कहा कि आवेदनों की जांच की जाती है और जिला स्तरीय सत्यापन के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

अनियमितताओं या आवेदनों को जल्दबाजी में मंजूरी दिए जाने की खबरों को खारिज करते हुए विभाग ने दावा किया कि ऐसे आरोप ‘‘पूरी तरह से निराधार’’ हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था।

पिछले सप्ताह विभाग के उप सचिव मिलिंद पद्मनाभ शेनॉय को उनके पद से हटाए जाने के बाद विवाद और गहरा गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा संस्थानों को दी गई स्वीकृतियों पर रोक लगाने के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

अधिकारियों के अनुसार, पहला अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र कथित तौर पर 28 जनवरी को अपराह्न 3.09 बजे जारी किया गया था और उसी दिन सात संस्थानों को स्वीकृति प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि अगले तीन दिन के भीतर स्वीकृतियों की कुल संख्या बढ़कर 75 हो गई, जिससे प्रक्रिया की गति पर सवाल उठने लगे।

इस बात की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया गया कि फाइलों को कैसे स्वीकृतियां दी गयीं, क्या उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और क्या अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले से लगे किसी भी निलंबन को औपचारिक रूप से हटा लिया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले बताया था कि मुख्यमंत्री ने घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और चेतावनी दी है कि यदि कोई अनियमितता या प्रक्रियात्मक चूक पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अपने पति अजित पवार की मृत्यु के बाद उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली सुनेत्रा पवार ने पहले ही अधिकारियों को मामले की गहन जांच करने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था। अब अल्पसंख्यक विभाग का प्रभार सुनेत्रा पवार के पास है।

भाषा गोला मनीषा वैभव

वैभव