मुंबई, छह अप्रैल (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने प्रसिद्ध ब्रांड ‘लिबास’ के फैशन डिजाइनर रियाज़ गांजी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है।
यह आदेश उस अवमानना याचिका में दिया गया, जिसमें संपत्ति की जानकारी न दिये जाने और बकाया राशि का मुद्दा था। अदालत ने कहा कि उनके (फैशन डिजाइनर के) व्यवहार के कारण उन्हें ‘‘कोई सहानुभूति या दया’’ नहीं मिलनी चाहिए।
न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने दो अप्रैल के आदेश में गांजी की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया, जबकि उन्हें अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।
एकल पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में उनकी (गांजी की) उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने कहा कि फैशन डिजाइनर का व्यवहार न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी को दर्शाता है और इसके लिए ‘कोई सहानुभूति या दया’ नहीं होनी चाहिए।
एकल पीठ उस याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसे जीएस मैजेस्टिक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने लिबास डिज़ाइंस लिमिटेड और अन्य के खिलाफ दायर किया था।
गांजी, लिबास डिज़ाइंस के प्रबंध निदेशक हैं।
यह विवाद लिबास के फ्रेंचाइज़ी स्टोर को लेकर उत्पन्न हुआ, जो पंजाब के लुधियाना में जीएसएम के ग्रैंड वॉक मॉल में था, जहां लिबास ने अनुबंधित बकाया राशि का भुगतान किए बिना परिसर छोड़ दिया।
याचिकाकर्ता ने दो अप्रैल को आरोप लगाया कि प्रतिवादियों ने पूर्व में अदालत के निर्देशों के बावजूद अपनी संपत्तियों का पूरी तरह और स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने इस बात का संज्ञान लिया कि प्रस्तुत किए गए विवरण अस्पष्ट थे, जिनमें केवल मुंबई के कुर्ला, पैडर रोड और लुधियाना जैसी जगहों का उल्लेख था, लेकिन सटीक पते नहीं दिए गए, जिससे संपत्ति जब्ती की कार्रवाई मुश्किल हो रही थी।
अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख (27 अप्रैल) को गांजी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए।
मुंबई पुलिस को संबंधित थाने के माध्यम से यह वारंट निष्पादित करने के लिए कहा गया है।
भाषा सुरेश सिम्मी
सिम्मी