पहलगाम हमले के पीड़ित की बेटी को सरकारी नौकरी का वादा 10 महीने बाद भी नहीं हुआ पूरा

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पहलगाम हमले के पीड़ित की बेटी को सरकारी नौकरी का वादा 10 महीने बाद भी नहीं हुआ पूरा

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 05:29 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 05:29 PM IST

पुणे/मुंबई, 16 फरवरी (भाषा) पहलगाम में हुए आतंकी हमले में अपने पिता की मौत के दस महीने बाद भी, असावरी जगदाले महाराष्ट्र सरकार द्वारा किये गए सरकारी नौकरी के वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं।

असावरी ने सोमवार को पुणे में अपनी चिंता व्यक्त की। इस संबंध में भाजपा नेता नवनाथ बान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस देरी का मुद्दा उठाने का वादा किया।

असावरी के पिता संतोष जगदाले उन 26 पीड़ितों में से एक थे जिनकी मौत पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में हुई थी।

इस नरसंहार के बाद, राज्य सरकार ने महाराष्ट्र के छह पीड़ितों के परिवारों को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और उनके परिजनों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी।

असावरी ने मीडिया कर्मियों से कहा, “मुझे सरकार में नौकरी दिये जाने का वादा किए हुए 10 महीने हो गए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इस संबंध में कोई प्रगति नहीं हुई है।”

उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य मेधा कुलकर्णी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य सरकार के आश्वासनों से अवगत कराया है।

असावरी ने कहा, “मैंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालयों से संपर्क किया है। अधिकारियों ने हमें केवल यही बताया है कि वे इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि पिता की मृत्यु के बाद से परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है और उनकी सारी बचत खत्म हो गई है। उन्होंने अधिकारियों से इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने का आग्रह किया।

असावरी की अपील के बारे में पूछे जाने पर, महाराष्ट्र भाजपा के मीडिया प्रभारी बान ने कहा कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे।

पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा का रुख आतंकी हमले से प्रभावित जगदाले परिवार और अन्य परिवारों का समर्थन करना है। मैं आश्वासन देता हूं कि मैं व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री और राज्य पार्टी नेतृत्व के साथ इस मामले को उठाऊंगा।”

भाजपा नेता ने कहा कि फडणवीस एक संवेदनशील नेता हैं जो इस मामले की जांच करेंगे और जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।

भाषा प्रशांत अविनाश

अविनाश