ऑटो, टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को छह महीने के लिए स्थगित करें: निरुपम

Ads

ऑटो, टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को छह महीने के लिए स्थगित करें: निरुपम

  •  
  • Publish Date - April 27, 2026 / 04:12 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 04:12 PM IST

मुंबई, 27 अप्रैल (भाषा) शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के वास्ते मराठी को अनिवार्य बनाने की योजना को छह महीने से एक साल तक के लिए टालने की अपील की है।

इस महीने की शुरुआत में, उनके पार्टी सहयोगी और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की थी कि महाराष्ट्र में एक मई से सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होगा।

सरनाईक ने कहा था कि मोटर परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि चालक मराठी भाषा को पढ़ और लिख सकते हैं या नहीं।

मंत्री ने चेतावनी दी है कि जिन चालकों को मराठी का बुनियादी ज्ञान नहीं है, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।

इस फैसले से नाराज होकर, ऑटो रिक्शा चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ श्रमिक संगठनों ने चार मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है।

निरुपम ने शनिवार को सरनाईक को लिखे एक पत्र में कहा कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य करने के फैसले से बेचैनी पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि मराठी महाराष्ट्र की पहचान और गौरव है, लेकिन किसी भी भाषा को जानना व्यक्ति की उसे सीखने और समझने की क्षमता पर निर्भर करता है।

निरुपम शिवसेना में प्रमुख उत्तर भारतीय चेहरा हैं।

उन्होंने अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि (ऑटो चालकों और रिक्शा चालकों के लिए मराठी को अनिवार्य बनाने का) निर्णय छह महीने से एक वर्ष के भीतर लागू किया जाए।’’

पूर्व सांसद ने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि इससे ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए आवश्यक समय मिलेगा और वे आत्मविश्वास से आगे आ सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें कुछ समय दिया जाना चाहिए।

पिछले सप्ताह, निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी परीक्षा आयोजित करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने और टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने वालों को छूट देने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा था कि प्रेम से सिखाई गई भाषा बनी रहती है, जबकि जबरदस्ती सिखाई गई भाषा केवल भय पैदा करती है।

सत्तारूढ़ ‘महायुति’ में शामिल शिवसेना के सदस्य निरुपम ने इस बात पर जोर दिया कि इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

भाषा

प्रशांत सुरेश

सुरेश