Pune Special Court On Rape Murder Case: 3 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या, कोर्ट ने दरिंदे को सुनाई ऐसी सजा, कांप उठेगी रूह

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Pune Special Court On Rape Murder Case: पुणे की एक विशेष अदालत ने तीन साल की बच्ची के दुष्कर्म-हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई।

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 01:12 PM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 02:25 PM IST

Pune Special Court On Rape Murder Case/Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • पुणे की विशेष अदालत ने बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाई
  • अदालत ने कहा कि अपराध बेहद जघन्य और सुनियोजित था
  • अदालत ने कहा कि मामले में सजा कम करने की कोई गुंजाइश नहीं है

पुणे। Pune Special Court On Rape Murder Case: पुणे की एक विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म-हत्या के मामले में सोमवार को 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई। इस घटना के बाद महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। अतिरिक्त न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. सालुंखे ने इस मामले को ‘‘दुर्लभ से दुर्लभतम’’ करार देते हुए भीमराव कांबले को सजा सुनाई, जो उस समय कठघरे में मौजूद था। जैसे ही न्यायाधीश ने मौत की सजा सुनाई, बच्ची का परिवार अदालत कक्ष में रो पड़ा।

अपने फैसले के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए न्यायाधीश सालुंखे ने कहा कि अभियोजन के पक्ष में काफी मजबूत साक्ष्य मिले हैं। अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘यह अपराध एक ऐसे आरोपी द्वारा हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने से संबंधित है, जिसका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गंभीर हमलों का एक लंबा इतिहास रहा है।’’ अदालत ने एक मई को हुई इस आपराधिक घटना के साठ दिन के भीतर 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया था।

बछड़ा दिखाने का झांसा देकर ले गया था अपने साथ

Pune Special Court On Rape Murder Case यह घटना एक मई को अपराह्न तीन बजे से चार बजे के बीच हुई थी। आरोप है कि कांबले पुणे जिले के नसरापुर गांव में बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची का यौन शोषण किया और फिर उसका मुंह दबाकर व छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी थी।

बेहद जघन्य अपराध

Pune Special Court On Rape Murder Case न्यायाधीश सालुंखे ने कहा, ‘‘यह अपराध बेहद जघन्य तरीके से किया गया और पीड़िता को यातनाएं दी गईं तथा मानवीय व्यवहार किया गया। पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी। उसकी हत्या केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए की गई, जो आरोपी की विकृत मानसिकता और नैतिक पतन को दर्शाती है। यह बिना किसी उकसावे के की गई सुनियोजित और निर्मम हत्या थी। अपराध को जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया, उसने न केवल न्यायपालिका की अंतरात्मा, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर दिया है।’’

अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई भी राहत की गुंजाइश नहीं है। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एकमात्र परिस्थिति जो सामने रखी जा सकती थी, वह थी आरोपी की उम्र, जो 65 वर्ष है। मेरे अनुसार, इसे राहत देने वाला कारक नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, यह अपराध की गंभीरता को और बढ़ाने वाला है।’’

 

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अदालत ने आरोपी को क्या सजा सुनाई?

विशेष अदालत ने दोषी को मौत की सजा सुनाई है।

यह मामला किससे जुड़ा है?

यह मामला तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है।

अदालत ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' क्यों माना?

अदालत के अनुसार अपराध अत्यंत जघन्य, सुनियोजित और एक असहाय मासूम बच्ची के साथ किया गया था, इसलिए इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी में रखा गया।

क्या आरोपी की उम्र को राहत का आधार माना गया?

नहीं। अदालत ने कहा कि 65 वर्ष की उम्र इस मामले में सजा कम करने का आधार नहीं बन सकती।

क्या मौत की सजा अंतिम होती है?

नहीं। भारत में मौत की सजा के मामलों में दोषी को कानून के तहत उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार होता है।