ठाणे की अदालत ने नाबालिग का पीछा करने और उत्पीड़न के आरोपी को बरी किया

ठाणे की अदालत ने नाबालिग का पीछा करने और उत्पीड़न के आरोपी को बरी किया

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  • Publish Date - January 7, 2026 / 12:46 PM IST,
    Updated On - January 7, 2026 / 12:46 PM IST

ठाणे, सात जनवरी (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने नाबालिग लड़की का पीछा करने और उसके यौन उत्पीड़न के आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उसके कृत्यों से ‘यौन मंशा’ प्रकट नहीं होती, जो यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत अपराध साबित करने के लिए आवश्यक तत्व है।

आरोपी मयूरेश कैलास शेलके (25) पेशे से मजदूर है। उस पर आरोप था कि उसने वर्ष 2019 में महाराष्ट्र के ठाणे शहर में 15 वर्षीय पीड़िता के घर में प्रवेश कर उससे अपने प्रेम का इजहार किया था।

न्यायाधीश रूबी यू मालवंकर ने अपने आदेश में कहा कि ‘पीड़िता के साथ कोई शारीरिक संपर्क नहीं हुआ’ और आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘इस मामले के तथ्यों के आलोक में अपने आप में किसी प्रकार की ‘यौन मंशा’ को दर्शाने वाले नहीं हैं।’

उन्होंने कहा, ‘‘किसे यौन मंशा माना जाए और किसे नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है और वर्तमान मामले में आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से ऐसी कोई यौन मंशा प्रतीत नहीं होती।’’

बाइस दिसंबर 2025 को पारित आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई।

यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसका पड़ोसी शेलके एक नवंबर 2019 को डोंबिवली के म्हात्रे नगर स्थित चॉल में उसके घर में उस समय घुस आया, जब वह अकेले थी और पढ़ाई कर रही थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता से कहा था, ‘‘मुझे ‘दादा’ मत कहो, मैं तुमसे प्यार करता हूं।’’ वह उसका पीछा करता था तथा बार-बार फोन करता था।

अभियोजन ने आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354डी (पीछा करना) और 441 (आपराधिक अतिक्रमण) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 (यौन हमला) और 11 (यौन उत्पीड़न) के तहत आरोप लगाए थे।

हालांकि, बचाव पक्ष के वकील अमरेश एस जाधव ने अभियोजन के मामले को चुनौती दी।

अदालत ने कहा कि कथित घटना एक घनी आबादी वाली चॉल में हुई, इसके बावजूद ‘‘किसी भी स्वतंत्र गवाह का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जो इस तरह की घटना को देखने की पुष्टि कर सके।’’

अदालत ने यह रेखांकित किया कि ‘‘यौनता या यौन मंशा का निर्धारण तथ्य का प्रश्न है।’’ अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपित अपराधों के कानूनी तत्व साबित करने में विफल रहा।

अदालत ने यह स्वीकार किया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। साथ ही यह भी कहा कि दोषसिद्धि के लिए उपलब्ध साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं।

भाषा मनीषा शोभना

शोभना